रकारी अस्पतालों में सोमवार सुबह से दौड़ भाग का नजारा था। सब कुछ व्यवस्थित व कर्मचारी डॉक्टर ड्यूटी पर मुस्तैद नजर आ रहे थे। मौका था कोरोना से निपटने के इंतजामों की मॉडड्रिल का। लिहाजा सायरन बजाती एबुलेंस व स्ट्रेचर पर डमी मरीज से लेकर कोरोना की जांच आदि के दृश्य अस्पतालों में उभरे। कोरोना के बढ़ते मरीजों व किसी संभावित नई लहर की आशंका के बीच आज केंद्र सरकार के निर्देश पर मप्र में भी अस्पतालों में कोरोना से निपटने के इंतजामों की मॉकड्रिल की जा रही है।

भोपाल में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने हमीदिया अस्पताल में इस मॉकड्रिल को देखा व इसमें शरीक भी रहे। उन्होंने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में सभी इंतजाम हैं। हालांकि मप्र में हालात चिंताजनक नहीं है। इंदौर समेत अन्य शहरों में भी मॉकड्रिल जारी है। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सभी राज्यों के हालातों पर समीक्षा बैठक की थी। इसके बाद मॉकड्रिल के निर्देश दिए गए थे।

मध्यप्रदेश में 32, देश में 5880 नए मरीज

इधर, मप्र में 32 नए मरीज मिले हैं। सबसे ज्यादा भोपाल में 9 नए संक्रमित सामने आए हैं। स्टेट कोविड हेल्थ बुलेटिन के अनुसार इंदौर में 6, जबलपुर में 5, नर्मदापुरम में 3, ग्वालियर, पन्ना - सतना, रायसेन में 2-2 और दतिया, खंडवा और उज्जैन में 1-1 नए मरीज मिले हैं। इसके अलावा प्रदेश भर में 63 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हुए हैं। अकेले भोपाल में गत दिवस 53 मरीज डिस्चार्ज हुए। भोपाल में एक्टिव केस की संख्या अब 69 है, जबकि बीते 24 घंटे में देशभर में 5880 नए मरीज मिले हैं। इस दौरान 12 की मौत भी हुई है तथा पॉजिटिविटी रेट सात के करीब हो गई है। दिल्ली, महाराष्ट्र व केरल में सबसे ज्यादा मरीज मिल रहे हैं।

लोगों में कोरोना से जुड़ी इम्यूनिटी कम इसलिए नई लहर का खतरा

आज राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने एम्स (झज्जर) का दौरा किया। कोविड के मामलों में उछाल देखते हुए नई लहर की आशंका को बल मिला है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन एक्सपर्ट डॉ. पूनम खेत्रपाल का कहना है कि इम्यूनिटी कम होने से ऐसा हो सकता है। उनके अनुसार, भारत को कोविड के मद्देनजर सर्विलांस बढ़ाने और वैक्सीनेशन तेज करने की जरूरत है, क्योंकि लोगों में कोरोना से जुड़ी इम्यूनिटी कम हो गई है। इसके चलते नई लहर का खतरा मंडरा रहा है। कोविड कैसज में उछाल के बीच डब्ल्यूएचओ की रीजनल डायरेक्टर का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है। पिछले साल भी इसी वक्त ओमिक्रॉम वेव शुरू हुई थी ।