भोपाल: राज्य सरकार ने अपने 37 साल पुराने कानून मप्र पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 में बदलाव कर दिया है। अब जिला कलेक्टर से बिना अनुमति लिये पहली बार नलकूप खनन करने पर जेल की सजा नहीं होगी बल्कि इस पर सिर्फ जुर्माना लगाया जायेगा। इसी प्रकार, जिला कलेक्टर द्वारा पेयजल की कमी को देखते हुये किसी क्षेत्र को जलाभाव क्षेत्र घोषित किया जाता है तो ऐसे क्षेत्र के जलस्रोतों से पहली बार सिंचाई एवं उद्योग के लिये पानी लेने पर भी जेल की सजा नहीं होगी बल्कि अर्थदण्ड लिया जायेगा।
दरअसल 37 साल पुराने उक्त कानून में प्रावधान किया गया था कि बिना अनुमति नलकूप खनन एवं जलाभावग्रस्त क्षेत्र में सिंचाई एवं उद्योग के लिये पानी लेने पर दो साल जेल की सजा एवं दो हजार रुपये जुर्माने से दण्डित किया जायेगा। परन्तु अब इस प्रावधान को ईज ऑफ डूईंग बिजनेस एवं अपराध को उसकी गंभीरता के अनुरुप करने के लिये बदल दिया गया है और अब ऐसा अपराध पहली बार करने पर पांच हजार रुपये अर्थदण्ड लिया जायेगा। परन्तु इसके पश्चात भी ऐसा ही निरन्तर अपराध करने पर हर अपराध के लिये दस हजार रुपये जुर्माना वसूला जायेगा या दो साल के कारवास से दण्डित किया जायेगा।
उक्त प्रावधान विधानसभा के डेढ़ माह पूर्व दिसम्बर के शीतकालीन सत्र में संशोधन विधेयक के रुप में पारित किया गया था जिसे अब राज्यपाल ने मंजूरी प्रदान कर दी है जिससे यह संशोधन कानून के रुप में पूरे प्रदेश में प्रभावशील हो गया है।