भोपाल में रहकर यमुना नदी के संरक्षण के लिए काम करने और लड़ने वाले मनोज मिश्रा नहीं रहे। उन्होंने रविवार को भोपाल के एक अस्पताल में अंतिम सांसें ली। सोमवार सुबह 11.30 बजे उनका भदभदा विश्राम घाट में अंतिम संस्कार किया गया वह मूलत- देहरादून के रहने वाले थे और अविभाजित वाले मप्र के कैडर अधिकारी थे।

मनोज मिश्रा ने यमुना नदी के संरक्षण के लिए न केवल लड़ाई लड़ी, बल्कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी ली थी। इस दौरान उनके जीवन में कई उतार- चढ़ाव आए, लेकिन वे कभी नहीं रूके। उन्होंने यमुना नदी के तट से अधिक शहरों में रहकर नदी संरक्षण के अधिकारों को कानूनी रूप से लड़ा था। मनोज मिश्रा को जानने वाले आईएफएस अधिकारी कहते हैं कि उन्होंने मप्र के जंगलों और वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए काम किया। वन विहार नेशनल पार्क के डायरेक्टर रहते हुए कई सुधार कार्य किए। खासकर नदियों के संरक्षण पर उनका जोर था। वह कहते थे कि नदियां जितनी जिएंगी, हम सब उतने ही खुशहाल रहेंगे। इसके लिए जरूरी है कि नदियों की निर्मलता पर काम किया जाए।

दिल्ली में किया था सत्याग्रह

मनोज मिश्रा ने दिल्ली में यमुना संरक्षण के लिए सत्याग्रह किया था। साथ ही यमुना में मिल रहे प्रदूषण को खत्म करने के लिए कई याचिकाएं लगाई थी। इनमें से कुछ को लेकर संतोषजनक निर्णय सामने आए थे।