मप्र कांग्रेस में एक बार फिर पदाधिकारियों की 'बहार' आ गई है। कुछ दिन पहले तक तो यह माना जा रहा था कि पदाधिकारियों की संख्या कम की जाएगी। अब यह और बढ गई है। देर रात घोषित इस कार्यकारिणी में 105 प्रदेश महामंत्री और 50 उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। जिलाध्यक्षों की लिस्ट भी जारी की गई है।
हालांकि भोपाल के शहर और ग्रामीण जिलाध्यक्षों पर कोई फैसला नहीं हुआ है। राजीव सिंह व जेपी धनोपिया को महामंत्री से उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं पुराने नेता मानक अग्रवाल की पीसीसी में बतौर उपाध्यक्ष फिर वापसी हुई है। जबकि सीएम शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह मसानी को फिर उपाध्यक्ष बनाया गया है। मगर कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल का रात को आया एक बयान खासा चर्चित है।
जिसमें उन्होंने कहा है कि यह सूची 'संपूर्ण व अंतिम' नही है बल्कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पूरी होने के बाद इसमें 'संशोधन या विस्तार' किया जा सकता है। फिलहाल जो सूची सामने आई है उसमें वरिष्ठ नेता अपने समर्थकों को पद • दिलाने में सफल रहे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव, अजय सिंह के समर्थकों को उपाध्यक्ष या महामंत्री बनाया गया है। हालांकि ज्यादा दबदबा नाथ व पचौरी समर्थकों का नजर आता है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे को उपाध्यक्ष बनाया तो रामेश्वर नीखरा, शोभा ओझा, महेंद्र जोशी को भी उपाध्यक्ष व चारों कार्यकारी अध्यक्षों रामनिवास रावत, बाला बच्चन, जीतू पटवारी और सुरेंद्र चौधरी भी राजनीतिक मामलों की समिति में आ गये। हालांकि इस समिति में नकुल नाथ के नाम पर अंदरूनी तौर पर काफी आश्चर्य है। वन मंत्री विजय शाह के भाई अजय शाह को भी जगह मिली है।
बसपा से कांग्रेस में आए फूलसिंह बरैया को उपाध्यक्ष बनाकर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में उनका उपयोग करने का संकेत है। अरुण यादव से जुडे रहे दीपचंद यादव, चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी को महामंत्री बनाया गया है लेकिन रवि सक्सेना की उपेक्षा की है। चर्चा है कि काम करने वालों की जगह नेताओं के समर्थकों को मौका दिया व एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत का पालन भी नहीं किया गया।
दो पदोन्नतियां और एक वापसी का मर्म
राजीव सिंह को पीसीसी में 'फुल टाइमर' के नाते पदोन्नति मिली है वे नाथ- पचौरी के विश्वस्त भी हैं। कानून के गहरे जानकार जेपी धनोपिया को प्रकोष्ठ प्रभारी के नाते पूरे सूबे में कांग्रेस की नयी नेटवर्किंग शुरू करने का इनाम नाथ से मिला है। वहीं, मानक अग्रवाल को उनके अनुभव वरिष्ठता के चलते वापस मुख्यधारा में लाना अपरिहार्य हो रहा था। नाथ व प्रभारी जेपी अग्रवाल उनके पक्ष में थे।
शिवराज का कटाक्ष- पिता-पुत्र की पार्टी !
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस की इस नई टीम पर तंज कसते हुए कहा. कार्यकारिणी नहीं सर्कस है। सीएम ने कहा कि कांग्रेस में कार्यकर्ता कोई बच्चा ही नहीं जितने थे, सब पदाधिकारी बना दिए। पॉलिटिकल अफेयर कमेटी में तो पिता के साथ पुत्र भी शामिल हैं। कांग्रेस कहीं मां- बेटे की पार्टी है, तो कहीं पिता-पुत्र की पार्टी। ये कांग्रेस की नियति हो गई है।