भोपाल: राज्य के वन विभाग ने सोन घडिय़ाल अभयारण्य में तथा इसके ईको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत रीवा-सीधी सिंगरौली नई बड़ी रेल लाइन परियोजना में रेल लाइन एवं गोपद नदी पर पुल निर्माण हेतु सीधी एवं सिंगरौली जिले की 41.175 हेक्टेयर भूमि पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर को उपयोग पर देने की वन्यप्राणी अनुमति प्रदान कर दी है। अब यह मामला राष्ट्रीय वन्यप्राणी बोर्ड की अनुशंसा हेतु भेजा जायेगा।

दरअसल यह अनुमति उप मुख्य अभियंता (निर्माण), पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर द्वारा मांगी गई थी तथा क्षेत्र संचालक संजय टाइगर रिजर्व सीधी ने भी यह अनुमति देने की सिफारिश की थी। इस निर्माण योजना में 16.5861 हेक्टेयर वनभूमि एवं 24.5889 हेक्टेयर राजस्व भूमि है। योजना की कुल लागत 1680 करोड़ रुपये है। इस योजना से वन्यप्राणियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों को आवागमन हेतु रेल सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

इस प्रकरण में राज्य के वन विभाग ने शर्त रखी है कि रेल्वे द्वारा संरक्षित क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना लागत की 5 प्रतिशत की राशि मप्र टाइगर फाउंडेशन सोसायटी के खाते में जमा करायी जावेगी। नियमानुसार नेट प्रेजेन्ट वेल्यू एवं अन्य शुल्क देय होगा। वन एवं वन्यप्राणियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जायेगा। रेल्वे द्वारा पुल प्रारंभ होने के 500 मीटर पूर्व एवं पुल के बाद भी 500 मीटर तक रेल लाइन के दोनों ओर जीआई तार की महीन जाली निर्मित की जायेगी ताकि यात्रियों द्वारा कोई सामग्री जलीय जीवों के रहवास में न फेंकी जा सके एवं नदी को प्रदूषण से बचाया जा सके। 

अभयारण्य क्षेत्र के भीतर पत्थर तोडऩे/उत्खनन/नदी-नालों से अवैध रेत उत्खनन/वृक्ष कटाई  तथा वन संपदा को नुकसान पहुंचाना पूर्णत: प्रतिबंधित होगा। निर्माण के दौरान श्रमिक कैम्प सोन घडिय़ाल अभयारण्य की सीमा में नहीं लगाया जायेगा। श्रमिक कैम्प अभयारण्य सीमा से बाहर कम से कम 250 मीटर की दूरी पर लगाया जायेगा तथा रात्रि के दौरान निर्माण क्षेत्र में वाहन एवं श्रमिकों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन निर्माण की अवधि अनुमति प्राप्त होने के उपरांत 5 वर्ष तक रहेगी।