मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो गया। यह मौजूदा शिवराज सरकार के कार्यकाल का अंतिम बजट सत्र है। अभिभाषण में भी राज्यपाल मंगूभाई पटेल के इसका जिक्र किया और कहा कि 15वीं विधानसभा के पांचवे तथा अंतिम बजट को संबोधित करते हुए मुझे खुशी हो रही है। अब पीएम मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत की यात्रा शुरू हो गई है। मप्र भी कंधे से कंधा मिलाकर प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने में अपना योगदान दे रहा है।
आजादी मृतकाल में पीएम के दूरदर्शी नेतृत्व में जी- 20 की बैठक समृद्ध भारत की प्रतिध्वनि है। राज्यपाल ने कहा कि मप्र के लिये पांच नवंबर 22 की तारीख अमर हो गई है। इस दिन राष्ट्रपति के करकमलों से पेसा कानून लागू हो गया है। जनजातीय भाइयों को जल, जंगल, जमीन से जुडे अधिकारों में शक्ति संपन्ना बना दिया है। 2021- 22 आजादी का अमृत महोत्सव जनजातीय सेनानायकों की गौरवगाथाओं से परिपूर्ण रहा है। रानी कमलापति और टंट्या भील के नाम पर रेलवे स्टेशन के नामकरण सरकार की ओर से इन नायकों के चरणों में सच्ची श्रद्धांजलि है।
17 हजार करोड़ की सड़कें, माफिया पर नकेल
राज्यपाल ने कहा कि 3 साल में 17500 करोड़ से अधिक की लागत के मार्ग बने। अटल टनल, नर्मदा-विंध्य एक्सप्रेस-वे विकास के नए मार्ग साबित होंगे। आम आदमी के हवाई यात्रा के सपने नए हवाई अड्डों के निर्माण से साकार होंगे। सिंचाई क्षमता को लगातार विकसित किया जा रहा है। संत रविदास महाराज का स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया है। सरकार सीएम लाडली बहना योजना ला रही है।
इस्लाम नगर का नाम जगदीशपुर किए जाने से पुराना गौरव वापस लौट आया है। तीर्थ दर्शन योजना पुनः प्रारम्भ कर दी गई है। इंदौर स्वच्छता में देश का नम्बर 1 शहर है। स्मार्ट सिटी परियोजना के क्रियान्वयन में टॉप 10 स्टेट में एमपी में शामिल है। प्रदेश के जन-जन का सहयोग, स्नेह, जनभागीदारी है। सरकार माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने नक्सलियों को मार गिराने का काम किया है। राज्यपाल ने केन-बेतवा परियोजना, महाकाल लोक, पेसा और नए मेडिकल कॉलेज खोलने का भी जिक्र किया।
पहली बार पेपरलेस बजट, कई सुर
इस बार बजट सत्र का खासियत पहली बार पेश होने वाला पेपरलेस बजट है। बजट 1 मार्च को पेश होगा। विधानसभा की ओर से इसके लिए विधायकों को टैबलेट दिए जाएंगे। टैबलेट चलाने के लिए ट्रेनिंग भी विधानसभा सचिवालय कराएगा। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा है कि ई-बजट के लिए विधायकों को टैबलेट देना नवाचार है। ये इस 5 साल का अंतिम बजट है।
जैसे मैराथन की अंतिम 100 मीटर की दौड़ में सारी ताकत लगाना पड़ती है, इसी तरह विधायकों से आग्रह है कि इस बार पूरी ताकत लगाएं। दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने डिजिटल बजट का विरोध करने की बात कही है। उन्होंने कहा- मैं विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध करूंगा कि मध्यप्रदेश में एससी/एसटी, गरीब, पिछड़े तबके के विधायक हैं। उन्हें पूरी तरह से डिजिटल टेक्नीक की जानकारी नहीं है। इस तरह की प्रक्रिया, जिसके पक्ष में ज्यादा लोग नहीं हों, उन्हें पेपर न देकर, डिजिटल बजट देना तानाशाही है। कागजों पर जानकारी मिलती, तो इसे लोग पढ-समझ सकते थे।
ई- बजट से खर्च कम
इधर पेपरलेस बजट पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्री भूपेंद्र सिंह का कहना है कि, ओडिशा की विधानसभा में अभी ई-बजट आया है, देश की दूसरी विधानसभाओं में भी ई-बजट आ रहा है। हम धीरे-धीरे तकनीक का उपयोग करेंगे। एक टैबलेट पर सारी जानकारी होगी। इससे वित्तीय खर्च भी कम आएगा।