भोपाल: बुरहानपुर में जंगल माफिया और राजनेताओं के गठबंधन के सामने स्थानीय प्रशासन लाचार है. शायद यही वजह रही कि अतिक्रमण माफियाओं से 700 हेक्टेयर वन भूमि मुक्त कराने और उनसे ₹5 करोड़ की इमारती लकड़ी जब्त करने के एवज में डीएफओ अनुपम शर्मा को 2 महीने में ही बुरहानपुर से स्थानांतरित कर मुख्यालय में अटैच कर दिया.
अचानक अनुपम शर्मा को हटाए जाने पर कई सवाल खड़े होने लगे पर 2 महीने के भीतर हुए तबादले को वन मंत्री विजय शाह और अपर मुख्य सचिव वन जेएन कंसोटिया प्रशासनिक बता रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि शासन ने कलेक्टर- एसपी के दबाव में शर्मा को हटाया गया. डीएफओ के हटाए जाने का दूसरा कारण अतिक्रमण माफिया और नेताओं का दबाव भी माना जा रहा है.
राज्य शासन ने सोमवार को आदेश जारी कर डीएफओ अनुपम शर्मा को बुरहानपुर से हटाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय सतपुड़ा भोपाल पदस्थ किया है. उनकी जगह पर नीमच डीएफओ विजय सिंह की पोस्टिंग की गई है. 2018 बैच के आईएफएस अनुपम शर्मा ने अति संवेदनशील वन मंडल बुरहानपुर का प्रभार ग्रहण करते ही अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया. उनका अतिक्रमणकारियों से मुठभेड़ भी हुई. उनकी तीर से घायल भी हुए किंतु उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बाज नहीं आए. यही नहीं, कलेक्टर और बुरहानपुर एसपी से अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मदद मांगी किंतु उनके आशा योगात्मक रवैया के बाद भी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मुहिम बंद नहीं हुई. यही नहीं, शर्मा ने कानून व्यवस्था को लेकर एसपी राहुल लोढ़ा को 13 मार्च को एक पत्र भी लिखा.
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(यह पत्र बना मुख्य कारण)
इस पत्र के जरिए एसपी लोढ़ा के 3 वर्षीय कार्यकाल का उल्लेख करते हुए लिखा कि अतिक्रमणकारियों के मन में पुलिस का खौफ नहीं है. उन्होंने इस पत्र में यह भी लिखा कि अतिक्रमणकारियों फूल सिंग सुबला, रेव सिंग लीलाराम जैसे कुख्यात अपराधियों के खिलाफ पुलिस में भी मामले दर्ज हैं पर उन पर कार्यवाही नहीं की गई. उनके इस पत्र को ही आईएएस और आईपीएस लॉबी ने बड़ी गंभीरता से लिया. एसपी को पत्र लिखने के बाद से ही डीएफओ अनुपम शर्मा के हटाने की भूमिका बनने लगी थी. मार्च में ही उन्हें हटाया जाता तो सरकार पर सवाल उठे लगते इसलिए उन्हें एक महीने बाद बुरहानपुर से हटाया गया. वह भी तब, जब जिला और पुलिस प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बुलडोजर से कार्रवाई की.
शर्मा के तबदले फॉरेस्ट अफसरों के मनोबल
अनुपम शर्मा के हटाए जाने से वरिष्ठ अफसरों का मनोबल टूटने लगा है. आचरण संहिता में बंधे होने के कारण आईएफएस अधिकारी खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं किंतु नाम न छापने की शर्त पर शासन के तबादला आदेश की दबे स्वर से निंदा कर रहे हैं. सीनियर आईएफएस अफसरों का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद अतिक्रमण माफिया के हौसले बुलंद होंगे और हमारे अफसरों का मनोबल गिरेगा.
यह पहला अवसर नहीं है जब बुरहानपुर में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने वाले अफसरों के तबादले हुए हैं. इसके पहले भी अतिक्रमण माफिया से दो-दो हाथ करने वाले डीएफओ के तबादले होते रहे हैं. पिछले 3 महीने में ही बुरहानपुर के तीन डीएफओ के तबादले हो चुके हैं. इसके पहले प्रदीप मिश्रा को इसलिए हटाया गया, क्योंकि उन्होंने अपने एक बयान में अतिक्रमणकारियों का साथ देने वाले नेताओं का जिक्र कर दिया था. इसके बाद गिरजेश बरकड़े को 20 दिन में हटा दिया गया था. दिलचस्प पहलू यह है कि आईएफएस अफसरों के स्थानांतरण करने से पूर्व तबादला बोर्ड का अनुमोदन भी नहीं दिया जा रहा है.
इनका कहना है
"मुझे भी तबादला आदेश जारी हो जाने के बाद पता लगा है कि बुरहानपुर डीएफओ को हटा दिया गया है. मेरी जानकारी में नहीं था. ऊपर से कार्रवाई हुई है."
विजय शाह वन मंत्री
" बुरहानपुर डीएफओ अनुपम शर्मा का तबादला प्रशासनिक आधार पर हुआ है. इसके अलावा अन्य कोई वजह नहीं है. "
जेएन कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव वन