मुनव्वर राणा का एक शेर है- उस पेड़ से किसी को शिकायत न थी मगर, वह पेड़ सिर्फ बीच में आने से कट गया..। दरअसल विकास के नाम पर बदहवास राजधानी में रोज पेड़ों का कत्ल हो रहा है कहीं शोर उठ रहा है तो कहीं खामोशी है। निर्माण कार्यों की उड़ती धूल और मशीनों के शोर के बीच कई पेड़ 'गुनहगार की तरह सिर झुकाए' नजर आते हैं। हाल में दो ऐसे मामले सामने आए हैं जो चिंता भी गहरी करते हैं और कहीं दूर उम्मीद की एक रोशनी भी दिखाते हैं।

हरियाली के लिए पहचानी जाने वाली एक सड़क के दो पेड़ों को बचाने के लिए बच्चे उससे लिपट गए उनके अभिभावक भी सामने आ गए। पेड़ काटने पहुंचे अगले को पैर पीछे खींचना पड़े। यह वाक्या कटारा हिल्स क्षेत्र का है। वहीं दूसरी ओर बैरागढ़ के बोरवन पार्क में हाल में अधिकारियों ने सामने खड़े रहकर 85 पेड़ कटवा दिए। यह पेड़ भी करीब 40 से 50 वर्ष तक पुराने, जो पर्यावरण को ही नहीं, बल्कि आसपास के रहवासियों को शुद्ध हवा दे रहे थे। मगर क्षेत्र के लोगों ने भी इन पेड़ों को बचाने के लिए कोई खास पहल नहीं की।

दरअसल राजधानी में विकास या नये निर्माण कार्य के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटने का काम लंबे समय से चल रहा है। वैकल्पिक पौधारोपण महज कर्मकांड बनकर रह गया। स्मार्ट सिटी और सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों का कत्ल हो रहा है। कटारा में जिन दो पेड़ों के लिये लोग उतरे वे तो सड़क किनारे के हैं, जिन्हें पीडब्ल्यूडी हटाना चाहता है। लिहाजा कल सुबह कई लोग पेड़ों के पास पहुंचे। इनमें नन्हें बच्चे पेड़ों से चिपक गए। उन्होंने पेड़ न काटने की शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगा दी। 

बताया जाता है कि चूना भट्टी से बर्रई के बीच करीब 12 किलोमीटर सड़क 50 करोड़ रुपए में बन रही है वहीं विश्वकर्मा मंदिर के पीछे दो पेड़ सड़क किनारे ही है। बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी कहते हैं कि मंदिर के पीछे बरगद और पीपल के दो पेड़ है, जो करीब 20 साल पुराने हैं। यहां महिलाएं पूजा करने भी आती है।