भोपाल: प्रदेश के उमरिया जिले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भूमिगत पाईप लाईन बिछाई जायेगी। इसके लिये राज्य शासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
दरअसल मप्र जल निगम की परियोजना क्रियान्वयन इकाई जबलपुर के महाप्रबंधक द्वारा उमरिया जिले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर/ईको सेंसेटिव जोन के अंतर्गत करनपुरा-1 ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना में भूमिगत पाइप लाइन बिछाने हेतु 0.216 हैक्टेयर वनभूमि प्राप्त करने के लिये वन्यप्राणी अनुमति प्रदान करने के लिये पहले आवेदन केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर करना चाहा परन्तु तकनीकी गड़बडिय़ों के कारण वे आवेदन नहीं कर सके और उन्होंने प्रदेश के वन विभाग को आफलाईन आवेदन किया। आवेदन के अनुसार, परियोजना के अंतर्गत टाईगर रिजर्व के 5 कक्ष क्रमश: आरएफ-9, पी-74, पी-76, आरएफ-6, पी-82 के अंतर्गत भूमिगत पीने के पानी की पाइप लाइन लम्बाई 4810 मीटर कुल रकबा 0.216 हैक्टेयर की जरुरत थी। इसमें पी-74 की कुल लम्बाई 1050 एवं चौड़ाई 0.45 मीटर रकबा 0.047 हेक्टेयर राइट-ऑफ-वे के अंतर्गत न होकर संरक्षित क्षेत्र के अंदर से गुजरना प्रस्तावित है।
प्रस्तावानुसार परियोजना में 38 वृक्ष प्रभावित होना दर्शाया गया है। परियोजना की कुल लागत 40 लाख रुपये दर्शायी गई है। उक्त परियोजना से स्थानीय ग्रामीणों को पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है। इस प्रस्ताव को अब स्वीकृति दे दी गई है परन्तु कतिपय शर्तें भी लगा दी गई हैं। मसलन, भूमिगत पाइप लाइन डाले जाने हेतु ट्रंच की चौड़ाई 1 मीटर एवं गहराई 2 मीटर से अधिक नहीं होगी। वन एवं वन्यप्राणियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जायेगा। सूर्यास्त के पश्चात एवं सूर्योदय के पूर्व कार्य नहीं किया जायेगा।
नियमानुसार नेट प्रेजेन्ट वैल्यु एवं अन्य शुल्क देय होगा। निर्माण सामग्री संरक्षित क्षेत्र के बाहर से लायी जावेगी। प्रस्तावित 38 वृक्षों के अतिरिक्त अन्य कोई भी वृक्ष नहीं काटा जावे तथा उनकी जड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाया जावेगा। आवेदक संस्था द्वारा भूमिगत आंशिक पाइप लाइन राइट आफ वे में न होने के कारण वनभूमि का व्यपवर्तन होने से प्रकरण वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अधीन पृथक से अनुमति लिया जाना आवश्यक होगा। आवेदक संस्था को प्रभावित वनक्षेत्र में प्रत्येक 2 किमी पर मार्ग से कम से कम 100 मीटर दूर क्षेत्र संचालक द्वारा चयनित स्थलों पर, वन्यप्राणियों के लिए पेयजल हेतु एक नल कनेक्शन नि:शुल्क प्रदाय करना होगा। आवेदक संस्था द्वारा संरक्षित क्षेत्र में प्रस्तावित परियोजना लागत की 5 प्रतिशत की राशि स्टेट टाइगर फाउंडेशन सोसायटी के बचत खाता में जमा करायी जावेगी।
राज्य सरकार से स्वीकृति मिलने पर अब यह प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्यप्राणी बोर्ड के पास जायेगा तथा उसकी अनुमति मिलने पर आवेदक संस्था बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व में भूमिगत पाईप लाईन डाल सकेगी।