ज़मीन पर रेंगकर चलते हुए लोगों को देखकर यही समझा जाता है कि लोग किसी मंदिर में अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए गुहार लगाने जा रहे हैं। लेकिन विदिशा में ज़मीन पर रेंगते दिखे लोग न तो किसी मंदिर जा रहे थे और ना ही इन्होंने कोई मन्नत मांगी थी।
ये लोग साष्टांग दण्डवत मुद्रा में विदिशा मध्यप्रदेश के प्रशासक यानि कि प्रशासनिक मंदिर में अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे। विदिशा ज़िला मुख्यालय के कलेक्टर कार्यालय में ये लोग हाथ में अपनी समस्या से जुड़ा लेटर लिए हुए ‘जनसुनवाई’ की गुहार लगाते-लगाते बेबस होकर इस तरह रेंगते हुए आये।
पीड़ित परिवार न जाने “कितनी ही जनसुनवाईयों” में आता रहा है! मामला संपत्ति के बंटवारे से जुड़ा हुआ है। महिला और उसके साथ आए हुए पुरुष का कहना है, कि महिला के ससुर ने संपत्ति का गलत तरीके से बंटवारा किया। जिसके चलते उन्होंने विदिशा कलेक्टर उमाकान्त भार्गव से गुहार भी लगाई।
हताश होकर महिला ने कार्यालय के अंदर ख़ुद पर पेट्रोल डाल कर आग लगाने की कोशिश भी की, लेकिन महिला तहसीलदार ने उसे पकड़ लिया।
विदिशा कलेक्टर और उनकी टीम पर ख़ानापूरी करने के लिये ‘जनसुनवाई’ का तामझाम रचने के आरोप भी लगते रहे हैं।
विदिशा के कलेक्टर ‘उमाकान्त भार्गव’ का कहना है, कि ये इनका पारिवारिक मामला है, जो सिविल कोर्ट में चल रहा है। हम इनकी पूरी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। इनको हम वकील और वकील की फीस भी मुहैया करवाने की कोशिश कर रहे हैं।
महिला की हताशा साफ देखी जा सकती है, न जाने कब से महिला कलेक्टर कार्यालय के चक्कर जनसुनवाइयों में आने के लिए लगा रही है। न जाने कब प्रशासन जागेगा और महिला और उसके परिवार को न्याय मिल पाएगा।