भोपाल: वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने मार्च में फील्ड के अफसरों पर राशि खर्च करने का दबाव बढ़ा. किसके दबाव में अधिकारी आनन-फानन बहुचर बनाने में जुट गए हैं. एक की झलक शुक्रवार को वन वन प्रमुख आरके गुप्ता के वीडियो कांफ्रेंसिंग में सुनाई दी. इसके लिए दक्षिण बालाघाट के डीएफओ जीके बरकड़े को फटकार लगी. वन वन प्रमुख गुप्ता ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में दक्षिण बालाघाट डीएफओ से सार्वजनिक तौर पर कहा कि 4 दिन में 87% राशि खर्च करने कर दिए. क्या आपने बाउचर दबा कर रखे थे ?
वीडियो कांफ्रेंसिंग में अकेले बरकड़े को फटकार नहीं लगी बल्कि वन बल प्रमुख के निशाने पर खंडवा सर्किल के प्रभारी सीसीएफ टीएस सूलिया और सीसीएफ सामाजिक वानिकी अनिल कुमार सिंह भी रहे. सूलिया को इसलिए फटकार लगी कि खंडवा में अतिक्रमण और अवैध कटाई हो रही है और उन्होंने उसे रोकने के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं बनाए. सीसीएफ अनिल कुमार सिंह के मामले में पीसीसीएफ सामाजिक वानकी अतुल जैन ने कहा कि बजट तो जल्दी-जल्दी मांगते हो पर खर्च कर नहीं पाते? पीसीसीएफ जैन ने सीसीएफ सिंह से सवाल किया कि ट्रेजरी में कितने बिल लगाए हैं? इस पर सीसीएफ सिंह ने गोलमोल जवाब देते नजर आए. ग्रीन इंडिया मिशन के एपीसीसीएफ एसपी शर्मा ने पर्यावरण वानिकी बजट खर्च नहीं करने पर सीहोर वन संरक्षक अनुपम सहाय से यह कहते हुए सवाल किया कि आप तो काबिल अफसर हो पर खर्च क्यों नहीं कर पाए? इसका जवाब भी सहाय ने बड़ी ही शालीनता से दिया कि बजट ही देरी से प्राप्त हुआ और बैंकों के सॉफ्टवेयर में तकनीकि दिक्कत आ रही है.
कैंपा फंड की राशि नहीं खर्च कर पा रहे हैं अफसर :
ग्वालियर डीएफओ बृजेंद्र श्रीवास्तव, डीएफओ छतरपुर अनुराग कुमार, रतलाम, वन विहार, उत्तर एवं दक्षिण शहडोल और पश्चिम छिंदवाड़ा सहित एक दर्जन डीएफओ ने कैंपा फंड की राशि खर्च करने में कंजूसी बरती. अब मार्च महीने में आनन-फानन में बाउचर बनाए जा रहे हैं. बाउचरों की अचानक बढ़ती संख्या देखकर सीनियर अफसर उसके यूटिलाइजेशन को लेकर सवाल उठाने लगे हैं. वन विकास प्राधिकरण के एक मद में दक्षिण सिवनी और सीहोर डीएफओ ने चार से 5% राशि खर्च किए हैं.
उत्तम शर्मा ने उठाया राशन भत्ता का मामला :
वीडियो कांफ्रेंसिंग में पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने कर्मचारियों के राशन भत्ता का सवाल उठाया. शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार से राशन भत्ता के रूप में 50-60 लाख रुपए हमें नहीं मिले हैं. उत्तम शर्मा के लाख टके का सवाल पर वन बल प्रमुख से लेकर वहां उपस्थित सभी सीनियर अफसर मुख बगैर बन गए, क्योंकि यह बजट केंद्र सरकार द्वारा होने दिया जाता है. अकेले पन्ना टाइगर रिजर्व के कर्मचारियों का राशन भत्ता बकाया नहीं है, बल्कि प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में राशन भत्ते की राशि नहीं दी गई है. कान्हा नेशनल पार्क में 40 लाख बकाया है तो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 50-60 लाख रुपया बकाया है. कमोबेश यही स्थिति, पेंच नेशनल पार्क और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की भी है. यहां इस बात का उल्लेख करना अभी उचित होगा कि एनटीसीए के बजट में बड़ी राशि की कटौती की गई है. यानी पहले एनटीसीए को 400 करोड़ राशि मिलती थी. इस बार एनटीसीए को 275 करोड़ ही मिले हैं.