भारतीय समाज में लड़कियों के सामने आने वाली असमानताओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बाल दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण में बालिकाओं के लिए समान अवसरों की वकालत करता है, बल्कि बालिकाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता को भी बढ़ावा देता है। 

यह दिन बाल विवाह, लड़कियों के खिलाफ भेदभाव और लड़कियों के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों को संबोधित करता है। भारत में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 24 जनवरी को राष्ट्रीय बाल दिवस के रूप में मनाना शुरू कर दिया है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लड़कियों के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लड़के और लड़कियों के बीच अंतर को कम करना है।

लड़के-लड़कियों को समान अधिकार मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बालिका दिवस पर शुभकामनाएं दी हैं। 

आइए जानते हैं राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत कब और क्यों हुई। बालिका दिवस 24 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है? इसकी एक खास वजह है।

24 जनवरी, 1966 को इंदिरा गांधी ने पहली महिला प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली थी। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने की उपलब्धि को ध्यान में रखते हुए 24 जनवरी को महिला दिवस के रूप में चुना गया है। 

राष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास

राष्ट्रीय बालिका दिवस की स्थापना 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी। तब से हर साल यह दिन एक विशेष थीम के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। इस कदम का उद्देश्य लैंगिक असमानता, शिक्षा में सीमाओं, स्कूल छोड़ने, लड़कियों की स्वास्थ्य देखभाल, बाल विवाह और लिंग आधारित हिंसा से जूझ रहे समाज में लड़कियों के सामने आने वाली अनूठी चुनौतियों को स्वीकार करना है। 

राष्ट्रीय बालिका दिवस 2024 के जश्न के लिए अभी तक किसी थीम की घोषणा नहीं की गई है। पिछले कुछ वर्षों के विषयों की बात करें तो 2019 में 'उज्ज्वल कल के लिए लड़कियों को सशक्त बनाना', 2020 में 'मेरी अवाज़', 2021 में 'डिजिटल जेनरेशन' जैसी थीमें रखी गई थीं।