संसद के शीतकालीन सत्र के 11वें दिन (18 दिसंबर) दोनों सदनों के 78 सांसदों को निलंबित कर दिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सांसदों के निलंबन को लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने कहा- 13 दिसंबर 2023 को संसद पर एक हमला हुआ, आज फ़िर मोदी सरकार ने संसद और लोकतंत्र पर हमला किया है। तानाशाही मोदी सरकार द्वारा अभी तक 92 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर, सभी लोकतांत्रिक प्रणालियों को कूड़ेदान में फेंक दिया गया है।

हमारी दो सरल और सहज माँगे हैं - 1. केंद्रीय गृह मंत्री को संसद की सुरक्षा में गंभीर उल्लंघन पर संसद के दोनों सदनों में बयान देना चाहिए। 2. इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री जी अखबार को इंटरव्यू दे सकते हैं; गृह मंत्री टीवी चैनलों को इंटरव्यू दे सकते हैं... लेकिन, भारत की संसद जो देश के पक्ष-विपक्ष दोनों, पक्षों का प्रतिनिधित्व करती है, यहाँ भाजपा अपनी जवाबदेही से भाग रही है ! 

विपक्ष-रहित संसद में मोदी सरकार अब महत्वपूर्ण लंबित कानूनों को बिना किसी चर्चा-बहस या असहमति से बहुमत के बाहुबल से पारित करवा सकती है ! हमारी मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह दोनों सदनों में इस मुद्दे पर बयान दें और इस पर चर्चा करें। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा स्पीकर जगदीप धनखड़ को पत्र भी लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा कि टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन का निलंबन हटाया जाना चाहिए. ऐसा करना संसदीय परंपरा का उल्लंघन है।

दरअसल, संसद में सुरक्षा उल्लंघन के मुद्दे पर लोकसभा में लगातार चौथे दिन हंगामा हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 33 सांसदों को निलंबित कर दिया है। इसमें नेता अधीर रंजन चौधरी, कांग्रेस के 11, तृणमूल कांग्रेस के 9, डीएमके के 9 और अन्य दलों के 4 सांसद शामिल हैं। इसके बाद राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। इसके चलते स्पीकर जगदीप धनखड़ ने 45 विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र (22 दिसंबर तक) के लिए निलंबित कर दिया।

इससे पहले 14 दिसंबर को 13 सांसदों को लोकसभा से निलंबित कर दिया गया था। इसमें कांग्रेस के 9, सीपीआई (एम) के 2, डीएमके और सीपीआई के एक-एक सांसद शामिल हैं। इसके अलावा राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन को भी 14 दिसंबर को निलंबित कर दिया गया था। शीतकालीन सत्र के बाद से अब तक कुल 92 सांसदों को निलंबित कर दिया गया।

राज्यसभा में सांसदों की संख्या 245 है। इसमें बीजेपी और उसके सहयोगियों के 105, I.N.D.I.A के 64 और अन्य के 76 लोग शामिल हैं। जिनमें से 46 विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।

वहीं, लोकसभा में सांसदों की संख्या 538 है। एनडीए के 329 सांसद हैं, इंडिया एलाएंस के पास 142 सांसद हैं और अन्य दलों के पास 67 सांसद हैं। जिनमें से 46 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।

कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 15 मिनट का भाषण दिया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि घटना का राजनीतिकरण किया जा रहा है। हंगामा बढ़ता देख सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में दोपहर 2 बजे तक और फिर कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सांसदों के निलंबन के बाद लोकसभा को कल (मंगलवार) तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि संसद की सुरक्षा में चूक की उच्च स्तरीय जांच चल रही है। इस मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। पहले भी जब ऐसी घटनाएं हुईं तो पूर्व स्पीकरों द्वारा ही जांच प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस घटना का राजनीतिकरण किया जा रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ही सदन में बहस होनी चाहिए।

सदन में नारे लगाना, तख्तियां लाना, विरोध में वेल में आना और आसंदी के पास जाना उचित नहीं है। देश की जनता को भी यह व्यवहार पसंद नहीं है। जिन सांसदों को लोकसभा से निलंबित किया गया है उनका सुरक्षा चूक मामले से कोई संबंध नहीं है।