डाउन सिंड्रोम से पीड़ित इंदौर के 9 साल के अवनीश तिवारी मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करेंगे। अवनीश अपना दर्द भूलकर छोटी सी उम्र में बच्चों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। सोमवार की शाम विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया।

आपको बता दें कि इस साल 19 बच्चों को यह पुरस्कार दिया गया है। इस पुरस्कार के लिए चयनित होने वाले अवनीश तिवारी मध्य प्रदेश (इंदौर) से एकमात्र नाम हैं। वह सबसे कम उम्र के पुरस्कार विजेता हैं। ये सभी बच्चे गणतंत्र दिवस परेड में भी हिस्सा लेंगे।

जब अवनीश सिर्फ 1 वर्ष का था, तो उसके जैविक माता-पिता ने उसे एक अनाथालय में छोड़ दिया था क्योंकि वह आनुवंशिक गुणसूत्र विकार से पीड़ित था। अवनीश के दिल में जन्म से ही छेद है और उसके घुटने भी ठीक नहीं हैं। वह कई शारीरिक समस्याओं से भी परेशान थे।

वहीं, शहर के आदित्य तिवारी उसे गोद लेना चाहते थे, लेकिन नियम आड़े आ गए। वह अविवाहित था और युवा भी था। अवनीश को पाने के लिए आदित्य ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। उनके लंबे संघर्ष के बाद ही कारा ने एकल लोगों के लिए नियमों में बदलाव किया। अवनीश का यह दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार है। उन्हें सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग बच्चे का पुरस्कार भी मिल चुका है।

अवनीश के नाम चार विश्व रिकॉर्ड भी हैं। उन्हें 30 से अधिक उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उन्हें साल 2023 में चाइल्ड आइकन अवॉर्ड और डाउन सिंड्रोम एक्सीलेंस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने एक हजार से अधिक सेमिनार और वेबिनार को संबोधित किया है।

संयुक्त राष्ट्र और जिनेवा में कई सम्मेलनों में भी भाग लिया। अवनीश मुख्य रूप से अनाथ और विकलांग बच्चों के अधिकारों के लिए काम करते हैं। एक बाल तस्करी रैकेट का भी पर्दाफाश हुआ है। सात साल की उम्र में ट्रैकिंग करते हुए माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे। एवरेस्ट पर 600 मीटर की ट्रैकिंग का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।