मणिपुर में सबसे पुराना सशस्त्र समूह यूएनएलएफ हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने पर सहमत हो गया है। यूएनएलएफ ने बुधवार को नई दिल्ली में इस आशय के शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह जानकारी X पर शेयर करते हुए बताया कि एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई! पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के मोदी सरकार के अथक प्रयासों में एक नया अध्याय जुड़ गया है क्योंकि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) ने आज नई दिल्ली में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
गृह मंत्री ने कहा कि मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में यूएनएलएफ का स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं। भारत सरकार और मणिपुर सरकार की ओर से यूएनएलएफ के साथ आज हस्ताक्षरित शांति समझौता छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सर्वसमावेशी विकास के दृष्टिकोण को साकार करने और पूर्वोत्तर भारत में युवाओं को बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में चरमपंथी संगठनों के साथ यूएनएलएफ पर प्रतिबंध लगाया था। प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ दिनों बाद यह शांति समझौता हुआ है। यूएनएलएफ मणिपुर में सबसे पुराना मैतेई विद्रोही समूह है, जिसकी स्थापना 24 नवंबर, 1964 में की गई थी।