कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद के लिए सभी 135 विधायकों से सीक्रेट मतदान भी कराया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस मतदान की पेटी दिल्ली में खुलेगी लेकिन इसके नतीजे जाहिर नहीं किये जायेंगे। बल्कि हाइकमान यह देखना चाहता है कि विधायकों की राय क्या है। इस बीच मप्र व छत्तीसगढ़ व राजस्थान के हाल देखकर कांग्रेस ने सिद्धारमैया के पांच साल में दो सीएम वाले सुझाव को दरकिनार रख दिया है। खबरें हैं कि उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र का हवाला देकर कहा था कि वे दो साल तक सीएम रहना चाहते हैं बाकी के तीन साल डीके शिवकुमार कुर्सी संभाले। लेकिन खुद शिवकुमार ने ही इसे खारिज किया बाद में पर्यवेक्षक भी सहमत नहीं दिखे। ज्ञात हो कि मप्र में भी दो मुख्यमंत्री वाले फार्मूले पर कमलनाथ व ज्योतिरादित्य सिंधिया में तलवारे खिंची थीं तो छत्तीसगढ़ में पिछले साल केपी सिंहदेव अनमने होकर दिल्ली चक्कर काटने लगे थे।
राजस्थान में तो अभी तक सीएम अशोक गहलोत व सचिन पायलट के बीच तलवारें खिंची हुई है। कर्नाटक में मुख्यमंत्री को लेकर विधायक दल की मीटिंग मे आधी रात तक रायशुमारी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और तीन ऑब्जर्वर्स सुशील कुमार शिंदे, दीपक बावरिया और भंवर जितेंद्र सिंह आज दिल्ली रवाना हो गये हैं। इन ऑब्जर्वर्स ने बेंगलुरु के शांगरी-ला होटल में विधायकों से वन-टू-वन बातचीत कर उनकी राय जानी। सिद्धारमैया हाईकमान से मुलाकात करने के लिए दिल्ली जाएंगे। वहीं डीके शिवकुमार का सोमवार को जन्मदिन है। इसलिए उनके दिल्ली जाने पर संशय है। जब वे समर्थकों से मिलने आए तो कहा- अभी दिल्ली जाने पर कोई फैसला नहीं किया है। हाईकमान पर फैसला छोड़ दिया है। मुझे जो काम सौंपा गया था, वो मैंने पूरा कर दिया है। बताया जाता है कि आधी रात तक चली बैठक में सिद्धारमैया प्रस्ताव रखा कि मुख्यमंत्री का चुनाव खड़गे ही करें। डीके समेत बाकी विधायकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इस मीटिंग से पहले शिवकुमार ने अपने जन्मदिन का केक काटा था। उन्होंने चुनाव में जीत को जन्मदिन का सबसे बड़ा तोहफा कहा था।
राज्यसभा गणित सुधर जाएगा
कर्नाटक में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद भाजपा को राज्यसभा में भी अपनी हार का असर देखने को मिलेगा । कर्नाटक में राज्यसभा की 12 सीटें हैं। आगे जब ये सीटें खाली होंगी तो भाजपा को संख्या बल पर नुकसान उठाना पड़ेगा। मौजूदा समय में राज्यसभा में भाजपा की 92 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस की 31 सीटें हैं। तृणमूल कांग्रेस की 13 सीटें, आम आदमी पार्टी और डीएमके की 10-10 सीटें हैं। कर्नाटक से उच्च सदन के चार सदस्य अगले साल रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में कांग्रेस को तीन सीटें फिर से मिल जाएंगी। तीन साल में पार्टी की पोजीशन भी राज्य की 12 सीटों में से 7 पर पहुंच जाएगी। चुनाव में जेडीएस को तगड़ा झटका लगा है और अब 2026 में एचडी देवगौड़ा का कार्यकाल पूरा होने के बाद जेडीएस की उच्च सदन में पोजीशन शून्य हो जाएगी।