उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडलगांव सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए वर्टिकल ड्रिलिंग के साथ-साथ मैनुअल क्षैतिज खुदाई भी सोमवार 27 नवंबर से शुरू हो सकती है। 16 दिनों से फंसे 41 मजदूरों तक पहुंचने के लिए 86 मी. वर्टिकल ड्रिलिंग की जानी है। अब तक 31 मीटर की खुदाई हो चुकी है।

वहीं सोमवार की सुबह सिलक्यारा साइड में फंसी ऑगर मशीन को काटकर बाहर निकाला गया। रविवार 26 नवंबर की शाम से इसे प्लाज्मा कटर से काटा जा रहा था। ये काम पूरी रात चलता रहा। इस काम में भारतीय सेना कोर ऑफ इंजीनियर्स और मद्रास सैपर्स लगे हुए थे। सुबह सफलता मिलते ही ये लोग खुशी से उछल पड़े। अब इस स्थान से मैन्युअल ड्रिलिंग फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

इसी बीच टनल में फंसे ग़रीब मज़दूरों को लेकर परिजनों ने सवाल उठाने भी शुरु कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि टनल में ग़रीब मज़दूर फँसे हैं, किसी नेता या उद्योगपति का बेटा होता तो 2 दिन में ही निकल आता। न क्रिकेट मैच का बहाना चलता और न चुनाव का। आर्मी भी आज से लगाई है, आर्मी लगाने में इतना विलंब से क्यों? धूल में लट्ठ मारे जा रहे हैं, कोई समन्वयित प्रयास नहीं हो रहा, सरकार का निकम्मापन नहीं तो और क्या है? 15 दिन से 41 मज़दूर फँसे हैं, परिजन परेशान हैं।

आपको बता दें, कि सुरंग में फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए सिल्कयारा छोर से अमेरिकी ऑगर मशीनों से रेस्क्यू पाइप खोदे जा रहे हैं। शुक्रवार 24 नवंबर को मजदूरों के स्थान से महज 10 मीटर पहले ही मशीन के ब्लेड टूट गये। जिसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। ड्रिलिंग मशीन का 13.9 मीटर लंबा ब्लेड मलबे में फंस गया। इसे लेजर और प्लाज्मा कटर से काटा गया।

वहीं, सुरंग के अंदर आर्मी इंजीनियरिंग कोर की 201वीं रेजीमेंट के 50 जवानों ने पाइप में फंसी ऑगर मशीन के शाफ्ट को काटकर अलग किया। अब मुंबई से बुलाए गए 7 सीवर विशेषज्ञ इन पाइपों में जाएंगे और हाथ से मलबा हटाकर रास्ता बनाएंगे।