चांद पर सबेरा हुए यानि सूरज निकले चार दिन हो गए हैं लेकिन चांद पर मौजूदा भारतीय चंद्रयान के 'जागने' के अब तक कोई संकेत नहीं मिले हैं। इसरो ने उसे काफी आवाजें दी हैं लेकिन जवाब में अब तक कुछ भी नहीं सुना। ऐसे में चांद की सतह पर अपने दोनों हीरोज विक्रम व प्रज्ञान के दूसरी पारी खेलने की उम्मीद धुंधली होती जा रही है। बता दें कि चांद पर 14 दिन तक रात और इतने ही दिन सबेरा रहता है। रात के चौदह दिन यहां तापमान शून्य से भी 200 डिग्री नीचे जा पहुंचता है।

इसीलिये चांद पर जैसे-जैसे दिन गुजर रहे हैं, पौने चार लाख किमी दूर धरती पर भारतीयों के दिलों में धुकधुकी बढ़ती जा रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या रोवर प्रज्ञान और विक्रम लैंडर हमेशा के लिए सो गए हैं? यह सवाल लोगों को इसरो के ट्विटर हैंडल, न्यूज वेबसाइट, टीवी चैनलों पर खींच रहा है। वे इस अपडेट का इंतजार कर रहे हैं कि काश ! कोई चमत्कार हो और चांद पर वे दोनों फिर से उठ खड़े हों।

इस वक्त तमाम आशंकाओं के बीच इसरो वैज्ञानिकों की एक बात हौसला बढ़ा रही है। क्योंकि इसरो ने कहा है कि वह पूरे 14 दिन तक चंद्रयान-3 के अपने विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर से संपर्क करने की कोशिश करता रहेगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि सूरज की रोशनी बढ़ने पर सोलर बैटरियां अच्छी तरह से चार्ज होंगी और वे दोनों धरती पर सिग्नल भेजने लगेंगे। कल्पना की जा रही है कि जल्द ही कुछ ऐसा हो कि इसरो को अचानक मैसेज मिले 'हैलो ISRO ! मैं आपको सुन पा रहा हूं...।'

6 अक्टूबर तक का वक्त

माना जा रहा है कि इसरो 6 अक्टूबर तक रोवर और लैंडर के जागने का वेट करता रहेगा। क्योंकि इसके बाद चांद पर अगला सूर्यास्त होगा और वहां अंधेरा खाने के साथ उम्मीद भी खत्म हो जाएगी। इसरो चेयरमैन एस सोमनाथ का कहना है कि अभी उम्मीद बाकी है और हम पूरे लुनार डे यानी धरती पर 14 दिन के बराबर समय तक इंतजार करेंगे क्योंकि वहां लगातार सूरज की रोशनी पड़ती रहेगी और तापमान बढ़ता जाएगा। जैसे-जैसे टेंपरेचर बढ़ेगा सिस्टम के एक्टिव होने की उम्मीद भी बढ़ेगी। उम्मीद है कि प्रज्ञान और विक्रम 14वें दिन भी धरती को सिग्नल भेजने लगे। साइंटिस्टों का कहना है कि यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि कब क्या हो सकता है।