देश में कई ऐसे महकमे केंद्र व राज्य सरकार में हैं जिनमें कर्मचारियों व अधिकारियों की भारी कमी है। अब ताजा रिपोर्ट यह है कि भारतीय सशस्त्र बलों के पास भी अफसरों की कमी है। भारतीय सेना में 2,094 मेजर कम हैं और 4,734 कैप्टन भी कम। युद्ध के समय में मोर्चे पर सैनिकों को इन दो रैंक के अफसर लीड करते हैं। करीब 14 लाख कर्मचारियों वाली सेना में 630 डॉक्टरों, 73 डेंटिस्ट्स और 701 नर्सों की भी कमी है।
उल्लेखनीय है कि खुद भारत सरकार ने यह जानकारी संसद में दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नौसेना और वायुसेना के पास भी समान रैंक के अफसरों का टोटा है। नेवी में 2,617 लेफ्टिनेंट कमांडर और छोटी रैंक वाले अफसरों की कमी है। भारतीय वायुसेना में 940 फ्लाइट लेफ्टिनेंट और 881 स्क्वाड्रन लीडर की दरकार है।
रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने लिखित प्रश्न के जवाब में कहा कि मेजर और कैप्टन रैंक के अफसरों की कमी के पीछे कोविड-19 महामारी के दौरान 'कम भर्ती' को जिम्मेदार माना जा सकता है। सभी कैडर में कम भर्ती हुई, अधिकतर शॉर्ट सर्विस कमिशन के जरिए। हालांकि सरकार ने कहा है कि अब सेना, नौसेना और वायुसेना में अफसरों की कमी को दूर करने के लिए स्स्ट में एंट्री को और आकर्षक बनाने की तैयारी है। इस संबंध में एक प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के पास है।
आकर्षक पैकेज लंबे समय से अटका
बताया जाता है कि सरकार ने अभी तक स्स्ट को आकर्षक बनाने वाले पैकेज को भी मंजूरी नहीं दी है। यह आमूल-चूल बदलाव का प्रपोजल लंबे अरसे से लटका है। नए पैकेज में पेडस्टडी लीव से लेकर 10-14 साल का कार्यकाल पूरा होने पर गोल्डन हैंडशेक जैसे विकल्प मिल सकते हैं।
युवाओं का सेना से मोहभंग
इस बारे में ऐक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सेनाओं में अफसरों की कमी 'चिंताजनक' है। छठे और सातवें वेतन आयोग के बाद अफसरों का वेतन कई गुना बढ़ा है, लेकिन युवाओं को कॉर्पोरेट सेक्टर के मुकाबले अब भी वह कम मालूम होता है।
सेना की जिंदगी मुश्किल और खतरनाक समझी जाती है, इस वजह से भी दिलचस्पी घटी है। फिर प्रमोशन की कम संभावनाएं, सेना का पिरामिड स्ट्रक्चर, बार-बार ट्रांसफर समेत अन्य पारिवारिक कठिनाईयां भी युवाओं का सेना से मोहभंग में महत्वपूर्ण हैं। अकादमियों में अफसरों की ट्रेन करने की पर्याप्त क्षमता न होना भी एक फैक्टर है।