भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को यथावत रखने का फैसला किया है। हालांकि सब्जियों की बेकाबू कीमतों से महंगाई भी बढ़ने के आसार हैं। बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बीते तीन दिनी बैठक के निर्णयों के बारे में बताया कि इस बार भी नीतिगत दर यानी यथावत रहेंगी। मतलब रेपो रेट 6.5 फीसदी ही रहेगा और होम लोन या ऑटो लोन लेने वालों पर ईएमआई का बोझ नहीं बढ़ेगा।
दास ने दावा किया भारत सही ट्रैक पर आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में ये दुनिया का ग्रोथ इंजन बनेगा। उन्होंने कहा कि हम दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी हैं तथा भारत फिलहाल ग्लोबल इकोनॉमी में जारी बदलाव का फायदा उठाने के लिए सबसे बेहतर स्थिति है।
आरबीआई के दायरे से बाहर निकल सकती है महंगाई
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की इकोरैप रिपोर्ट में टमाटर और प्याज की अगुवाई में खाद्य वस्तुओं के दाम में तेजी के चलते खुदरा महंगाई जुलाई, में मासिक आधार पर 1.90 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ अब 6.7 फीसदी के स्तर तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। बीते माह के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े 14 अगस्त को जारी किए जाएंगे। बीते एक महीने से ज्यादा समय से देश में टमाटर की कीमतें आसमान पर हैं।
फरवरी महीने से रेपो रेट में बदलाव नहीं
देश में महंगाई के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद इसे तय दायरे में वापस लाने के लिए रिजर्व बैंक ने मई 2022 के बाद से लगातार नौ बार रेपो रेट में इजाफा किया था। इस अवधि में ये दर 250 बेसिस प्वाइंट बढ़ाई गई थी। हालांकि, महंगाई पर कंट्रोल के साथ ही केंद्रीय बैंक ने इसमें बढ़ोत्तरी पर ब्रेक लगा दिया और फरवरी 2023 के बाद से इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया। ज्ञात हो कि रेपो रेट वह दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है।
महंगाई और रेपो रेट में कनेक्शन
भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई दर पर काबू पाने के लिए रेपो रेट बढ़ाता है और लोन महंगे हो जाते हैं। लोन महंगा होने से इकोनॉमी में कैश फ्लो में गिरावट आती है। इससे डिमांडमें कमी आती है और महंगाई दर घट जाती है। रेपो रेट के अलावा रिवर्स रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिसके अनुसार रिजर्व बैंक अन्य बैंकों को डिपॉजिट पर ब्याज देता है। जून में खुदरा महंगाई 4.8 फीसदी रही थी। जब देश महंगाई आरबीआई के तय दायरे से बाहर जाती है, तो फिर इसे कम करने के उद्देश्य से रेपो रेट में इजाफे का फैसला लिया जाता है।