बिहार में जातिगत जनगणना के नतीजे सामने आ गए हैं। बिहार सरकार ने अपना विवादास्पद जाति-आधारित सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। सरकार ने सोमवार को अपने जाति-आधारित सर्वेक्षण के नतीजे सार्वजनिक किए। मुख्य सचिव ने एक रिपोर्ट जारी करके जातिगत जनगणना के आंकड़े साझा किए।
सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद इसे लेकर कई नेताओं के बयान भी सामने आए हैं। सर्वे को लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है, कि बिहार की जातिगत जनगणना से पता चला है कि वहां OBC + SC + ST 84% हैं। केंद्र सरकार के 90 सचिवों में सिर्फ़ 3 OBC हैं, जो भारत का मात्र 5% बजट संभालते हैं। इसलिए, भारत के जातिगत आंकड़े जानना ज़रूरी है। जितनी आबादी, उतना हक़ - ये हमारा प्रण है।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का कहना है, कि जातीय गणना कराने का निर्णय बीजेपी सरकार ने किया था। आज बिहार सरकार ने आँकड़े सार्वजनिक किया है। बीजेपी आँकड़ो का अध्ययन कर रही है।
जनगणना से पता चलता है कि 13 करोड़ की आबादी में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत से अधिक है, जबकि अनुसूचित जनजाति की संख्या 1.68 प्रतिशत है। राज्य की आबादी में ऊंची जातियां या 'सवर्ण' 15.52 प्रतिशत हैं।
सर्वेक्षण के विस्तृत विवरण से पता चलता है कि पिछड़ा वर्ग आबादी का 27 प्रतिशत है, जबकि अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) 36 प्रतिशत है। साथ में, वे संख्यात्मक रूप से शक्तिशाली अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का गठन करते हैं, जो मंडल लहर के बाद से बिहार की राजनीति पर हावी रहे हैं।
यहां भूमिहारों की आबादी 2.86 प्रतिशत है, वहीं ब्राह्मणों की संख्या 3.66 प्रतिशत है। कुर्मी - मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समुदाय से हैं - जिनकी आबादी 2.87 प्रतिशत है। मुसहर 3 प्रतिशत हैं, और यादव - उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के समुदाय की - 14 प्रतिशत आबादी है।