हत्या एवं बलात्कार के दोषी डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 30 दिन की पैरोल मिल गई है और वह सुनारिया जेल से बाहर आ गया है। इस बार उन्हें डेरा मुख्यालय में जाने की इजाजत नहीं दी गई है लेकिन यह पहली बार नहीं है जब राम रहीम को पैरोल मिली हो, इससे पहले भी राम रहीम को छह बार पैरोल दी गई। इससे सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि पैरोल राज्य का अधिकार होता है और यह यह जेल में कैदी के अच्छे व्यवहार के तहत दी जाती है। अपनी दो शिष्याओं के साथ रेप के आरोप में 20 साल और हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे राम रहीम को इसी साल 21 जनवरी को भी 40 दिन की पैरोल मिली थी और तब वह पैरोल अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश के बरनावा आश्रम में रहा था।
इधर सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त और सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने डेरा प्रमुख को पैरोल दिए जाने का कड़ा विरोध किया है। एसजीपीसी प्रमुख एचएस धामी ने मांग की कि पैरोल रद्द की जानी चाहिए। अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि डेरा प्रमुख को नियमित आधार पर पैरोल दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जेलों में 30 साल से अधिक समय बिता चुके बंदी सिंहों (सिख कैदियों) को रिहा नहीं किया जा रहा है।