जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 370 हटाना संवैधानिक तौर पर सही फैसला है। केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा कि सितम्बर 2024 राज्य में चुनाव के लिए उचित कदम उठाये जाएँ।
कोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 356 के बाद केंद्र केवल संसद के द्वारा कानून ही बना सकता है, ऐसा कहना सही नहीं होगा। CJI ने यह भी कहा कि इस फैसले में 3 जजों के जजमेंट हैं। एक फैसला मेरा, जस्टिस गवई और जस्टिस सूर्यकांत का है। दूसरा फैसला जस्टिस कौल का है। जस्टिस खन्ना दोनों फैसलों से सहमत हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि अनुच्छेद 370 का अस्तित्व समाप्त होने की अधिसूचना जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति जम्मू-कश्मीर संविधान सभा के भंग होने के बाद भी बनी रहती है। अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर के संघ के साथ संवैधानिक एकीकरण के लिए था और यह विघटन के लिए नहीं था, और राष्ट्रपति घोषणा कर सकते हैं कि अनुच्छेद 370 का अस्तित्व समाप्त हो गया है।
जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।