कांग्रेस संसदीय दल प्रमुख सोनिया गांधी ने एक भावनात्मक पत्र लिखकर रायबरेली की जनता का आभार जताया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि वह स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के कारण अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। इसके साथ ही सोनिया ने रायबरेली की राजनीति से संन्यास ले लिया है। सोनिया ने अपने पत्र में रायबरेली के लोगों के लिए कई बातें कही हैं।

सोन्या गांधी ने पत्र में लिखा है, 

रायबरेली के मेरे स्नेही परिवारीजन, नमस्कार !

मेरा परिवार दिल्ली में अधूरा है। वह रायबरेली आकर आप लोगों में मिलकर पूरा होता है। यह नेह - नाता बहुत पुराना है और अपनी ससुराल से मुझे सौभाग्य की तरह मिला है।

रायबरेली के साथ हमारे परिवार के रिश्तों की जड़ें बहुत गहरी हैं। आजादी के बाद हुए पहले लोकसभा चुनाव में आपने मेरे ससुर श्री फीरोज गाँधी जी को यहाँ से जिताकर दिल्ली भेजा। उनके बाद मेरी सास श्रीमती इंदिरा गाँधी जी को आपने अपना बना लिया। तब से अब तक, यह सिलसिला जिंदगी के उतार-चढ़ाव और मुश्किल भरी राह पर प्यार और जोश के साथ आगे बढ़ता गया और इस पर हमारी आस्था मजबूत होती चली गई।

इसी रौशन रास्ते पर आपने मुझे भी चलने की जगह दी। सास और जीवनसाथी को हमेशा के लिये खोकर मैं आपके पास आई और आपने अपना आँचल मेरे लिये फैला दिया। पिछले दो चुनावों में विषम परिस्थितियों में भी आप एक चट्टान की तरह मेरे साथ खड़े रहे, मैं यह कभी भूल नहीं सकती। यह कहते हुए मुझे गर्व है कि आज मैं जो कुछ भी हूँ, आपकी बदौलत हूँ और मैंने इस भरोसे को निभाने की हरदम कोशिश की है।

अब स्वास्थ्य और बढ़ती उम्र के चलते मैं अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी। इस निर्णय के बाद मुझे आपकी सीधी सेवा का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन यह तय है कि मेरा मन-प्राण हमेशा आपके पास रहेगा। मुझे पता है कि आप भी हर मुश्किल में मुझे और मेरे परिवार को वैसे ही सँभाल लेंगे जैसे अब तक सँभालते आये हैं।

बड़ों को प्रणाम! छोटों को स्नेह! जल्द मिलने का वादा।

Image

आपको बता दें, कि सोनिया गांधी ने राजस्थान से राज्यसभा के लिए अपनी उम्मीदवारी दाखिल की है। सोनिया 1999 से लगातार लोकसभा की सदस्य हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के रायबरेली लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। वह अमेठी से लोकसभा सदस्य भी रह चुकी हैं। यह पहली बार होगा जब वह संसद के उच्च सदन में जायेंगी। 

1997 में, पार्टी के कोलकाता अधिवेशन में सोनिया कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्य बनीं। साल 1998 में वह पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष बनीं। साल 1999 में सोनिया ने पहली बार अमेठी से लोकसभा चुनाव जीता। 2004 में यूपीए सत्ता में आई। मनमोहन सिंह पीएम बने और सोनिया यूपीए अध्यक्ष बनीं।

2006 में, लाभ के पद विवाद के कारण, सोनिया ने संसद सदस्य और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सोनिया ने रायबरेली लोकसभा चुनाव में भारी अंतर से जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने साल 2014 और 2019 में रायबरेली से लोकसभा चुनाव भी जीता।