जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर  याचिकाओं पर 11 दिसंबर सोमवार को फैसला आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को अपना फैसला सुनाने जा रहा है। 

11 दिसंबर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड की गई सूची के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ फैसला सुनाएगी। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी चीफ महबूबा मुफ्ती का कहना है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन की गतिविधियां संकेत दे रही हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश हित के खिलाफ हो सकता है। 

मुफ्ती ने कहा कि शुक्रवार रात से हम देख रहे हैं कि विभिन्न पार्टियों खासकर पीडीपी के कार्यकर्ताओं के नामों की सूची पुलिस स्टेशनों द्वारा ली जा रही है और ऐसा लग रहा है कि कोई फैसला आने वाला है जो इस देश और जम्मू-कश्मीर के लिए बुरा होगा उसके पक्ष में नहीं। भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कुछ एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख रवींद्र रैना ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट या उसके फैसले पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए और उसके फैसले का पूरे देश को सम्मान करना चाहिए।

आपको बता दें जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए हुए चार साल से ज्यादा का समय हो गया है। हालाँकि, इसे रद्द करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की गईं। केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया। इसके लिए सरकार ने 'जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019' पेश किया, जिसे चुनौती दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं हुए हैं। हालाँकि, हाल के दिनों में स्थानीय चुनाव ज़रूर हुए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 पर सुनवाई करने वाली पांच जजों की बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं। 5 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला 11 दिसंबर के लिए सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को इस मामले पर क्या फैसला करता है इस पर पूरे देश के लोगों ने नजर बानाए रखी है। इस फैसले से जम्मू-कश्मीर का भविष्य भी तय होने वाला है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लेकर पूरे जम्मू-कश्मीर में किसी भी तरह के तनाव और संभावित संघर्ष को लेकर तैयारी की जा रही है। पुलिस पूरी तरह से तैयार है और सेना के जवान भी अलर्ट पर हैं। इस मुद्दे पर देशभर के राजनीतिक नेताओं द्वारा बयानबाजी की जा रही है। वहीं विपक्ष की ओर से जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर अनुच्छेद 370 को वापस लाने की कोशिश की जा रही है, जो केंद्र शासित प्रदेश को विशेष दर्जा देगा।