Andhra Pradesh-Telangana Row: तेलंगाना में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म हो गया है. कल 3 दिसंबर को नतीजे भी जारी हो जायेंगे. लेकिन, उससे पहले ही आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच नागार्जुन सागर बांध का मुद्दा गरमा गया हैं.

जानकारी के मुताबिक, वोटिंग होने से ठीक पहले आंध्र प्रदेश ने नागार्जुन सागर बांध पर कब्जा कर लिया. उसने बांध से अपनी तरफ पानी छोड़ना भी शुरू कर दिया है. इस वजह से दोनों राज्यों के बीच विवाद शुरू हो गया.

बता दें कि कृष्णा नदी पर बने नागार्जुन सागर बांध पर तेलंगाना सरकार का नियंत्रण है. नदी के पानी को लेकर पहले भी दोनों राज्यों में टकराव की स्थिति हमेशा पैदा होती रही है. अब एक बार फिर दोनों ही राज्य आमने-सामने है.

ख़बरों के मुताबिक, तेलंगाना में वोटिंग से पहले सुबह 2 बजे आंध्र प्रदेश के करीब 700 पुलिसकर्मियों ने बांध पर कब्जा कर लिया. उन्होंने दाहिनी नहर को खोल दिया, जिसकी वजह से प्रति घंटे 500 क्यूसेक कृष्णा नदी का पानी रिलीज हुआ.

इस पर आंध्र प्रदेश की राज्य सिंचाई मंत्री अंबाती रामबाबू ने जानकारी देते हुए एक्स यानी ट्विटर पर एक पोस्ट में लिखा, हम पीने के पानी के लिए कृष्णा नदी पर नागार्जुन सागर दाहिनी नहर से पानी छोड़ रहे हैं.

वहीं, रामबाबू ने मीडिया को दिए बयान के मुताबिक, उन्होंने सफाई में कहा कि हमने कोई समझौता नहीं तोड़ा है. कृष्णा नदी का 66 फीसदी पानी आंध्र प्रदेश का है. जबकि, 34 फीसदी तेलंगाना का है. हमने सिर्फ अपने क्षेत्र में अपनी नहर खोलने की कोशिश की है. इस पानी पर हमारा हक है.

विवाद बढ़ने पर केंद्र ने किया हस्तक्षेप-

आंध्र प्रदेश-तेलंगाना के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप कर विवाद को सुलझाने का प्रयास भी किया. केंद्र ने दोनों राज्यों से 28 नवंबर की स्थिति यानी समझौते के मुताबिक नागार्जुन सागर का पानी छोड़ने का आग्रह किया है.

यह प्रस्ताव केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान रखा है. दोनों राज्य इस योजना पर सहमत हो गए हैं. केंद्र ने किसी भी तरह के टकराव को होने से रोकने के लिए बांध की निगरानी की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को सौंप दी है. CRPF की निगरानी में ही दोनों पक्षों को समझौते के तहत पानी दिया जायेगा.