वायु प्रदूषण को लेकर हम कितने सजग है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दीपावली वाले दिन हमने पटाखें जलाकर खुद की प्राणवायु को मार करने की कोई कसर नहीं छोड़ी।
दीपावली वाली शाम से लेकर 24 घंटे तक वातारण धुआं-धुआं रहा। भोपाल की हवा की सेहत बताने वाला एयर क्वालिटी इंडेक्स 360 के पार पहुंच गया। इंडेक्स का यहां तक पहुंचना हवा की बहुत ही खराब स्थिति को दर्शाता है। यह स्थिति पटाखों को चलाने के कारण बनी। यही नहीं, ध्वनि प्रदूषण भी अपने रिकार्ड स्तर पर रहा। वायु व ध्वनि प्रदूषण के कारण लोगों को तो परेशान होना ही पड़ा, पक्षी भी शहर छोड़कर जंगलों की ओर निकल गए। यही नहीं, पटाखों की आवाज से पालतू जानवरों की सामत आ गई। यह हाल अकेले भोपाल का ही नहीं रहा, बल्कि ग्वालियर में तो और खराब स्थिति रही। यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुंच गया।
उल्लेखनीय है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स यदि 50 तक या उससे नीचे होता है तभी हवा की स्थिति को आदर्श माना जाता है लेकिन प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही यह इंडेक्स भी बढ़ने लगता है। दीपावली वाले दिन रात नौ बजे से शहर के लगभग सभी क्षेत्रों में आतिशबाजी तेज हो गई थी। लोगों ने जमकर पटाखे जलाए थे। कुछ ही समय बाद इसका असर भी दिखाई देन लगा। वातावरण में धुएं का स्तर बढ़ गया था।
उसके पहले दिन में सामान्य दिनों की तरह धूल के कणों ने परेशानी बढ़ा रखी थी। रात 10 बजे तक पीएम 10 का स्तर 300 के पार पहुंच गया था। पीएम 2.5 भी 150 के पार था। ये धूल व धुएं के कणों का मिश्रण होते हैं, जो हवा की सेहत को सबसे अधिक बिगाड़ते हैं। इसके अलावा पटाखों के धुएं से निकलने वाली विभिन्न हानिकारक गैसों का स्तर भी बढ़ गया था। जिसके कारण वातावरण के मामूली उपरी सतह पर धुएं की परत बन गई थी। जिसके कारण वातावरण में आक्सीजन का सामान्य स्तर भी कम हुआ था।
नहीं लिया सबक, इसलिए बिगड़ी स्थिति
प्रत्येक वर्ष दीपावली पर प्रदूषण का यही हाल रहता है। वर्ष 2022 की दीपावली पर भी एयर क्वालिटी इंडेक्स रिकार्ड उपर चला गया था। उसकी वजह भी पटाखें और धूल के कण ही थे। इसको लेकर पर्यावरण विभाग ने सलाह भी जारी की थी। इस वर्ष भी दीपावली के पहले से वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा था जिसे लेकर पर्यावरण विभाग सलाह जारी कर चुका था और कहा था कि खतरनाक व अधिक आवाज और धुआं छोड़ने वाले पटाखें न जलाए। तब भी सलाह नहीं मानी और स्थिति बिगड़ गई। पर्यावरण विद मानते हैं कि प्रदूषण एक धीमा जहर की तरह शरीर को नुकसान पहुंचाता है। तुरंत इसके दुष्परिणाम दिखाई नहीं देते, इसलिए लोग समझ ही नहीं पाते कि प्रदूषण कितना खतरनाक होता है। यही वजह है कि सलाह को दरकिनार करते हैं। इसलिए सबक नहीं लेते। वहीं विभाग भी कार्यवाही करने की बजाए खानापूर्ति करता है और पटाखे जलाए जाने के बावजूद मुकदर्शक बना रहता है।
एक रात में डेढ़ से दो गुना बढ़ा वायु प्रदूषण
दीपावली पर जलाए गए पटाखों की वजह से एक रात में प्रदेश का वायु प्रदूषण डेढ़ से दो गुना बढ़ गया। रविवार दिन की बात करें तो भोपाल का वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 के आसपास था, जो 12 घंटे में 356 तक पहुंच गया। इसी तरह ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर की वायु भी प्रदूषित हुई। वर्तमान में प्रदेश के 10 शहर ऐसे में हैं, जिनकी वायु सबसे खराब स्थिति में पहुंच चुकी है।
ऐसे समझें वायु गुणवत्ता सूचकांक : एयर क्वालिटी इंडेक्स (वायु गुणवत्ता सूचकांक) हवा की गुणवत्ता को बताता है। इससे पता चलता है कि हवा में किन गैसों की कितनी मात्रा घुली है। हवा की गुणवत्ता के आधार पर इस इंडेक्स में छह कैटेगरी बनाई गई हैं। यह हैं अच्छी, संतोषजनक, थोड़ा प्रदूषित। इसके अलावा खराब, बहुत खराब और गंभीर हवा की गुणवत्ता के अनुसार इसे अच्छी से खराब और फिर गंभीर की श्रेणी में रखा जाता है। इसी के आधार पर इसे सुधारने के लिए प्रयास किया जाता है।