मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम धर्म की मर्यादा हैं। हमें उनके चरित्र का अनुसरण करना चाहिए ताकि देश को कट्टरता से बचाया जा सके। कट्टरता से धार्मिक उन्माद पैदा होता है।
यह बात राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कही। वे विजयादशमी पर्व पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के 95वां स्थापना दिवस समारोह के मौके पर संघ के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। संबोधन से पहले मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन भी किया।
मोहन भागवत ने कहा- दुनिया में भारतीयों का गौरव बढ़ रहा है। हमारा देश हर क्षेत्र में तेजी से तरक्की कर रहा है। दिल्ली में जी-20 समिट का आयोजन हुआ। इसमें विदेशी मेहमानों के सत्कार को लेकर भारत की सराहना हुई। दुनिया ने विविधता से सजी हमारी संस्कृति का गौरव अनुभव किया।
मोहन भागवत ने कहा कि हमारे संविधान के प्रथम पृष्ठ पर भगवान् राम की तस्वीर है। अयोध्या में भगवन राम का भव्य मंदिर बन रहा है। 22 जनवरी को उसका लोकार्पण होगा। हम सभी तो नही जा पाएंगे, लेकिन हमारे आसपास के मंदिरों में हम जा सकते हैं। देश में धार्मिकता का वातावरण बने ऐसा प्रयत्न हम कर सकते है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत का अमृतकाल हमें देखने को मिल रहा है। विश्व 2000 साल से सुख की खोज में अनेक प्रयोग कर के थक गया। ऐसी कई चीजें हैं जिनका उसे हल नहीं मिला। सृष्टि विविध बनी है, वो विविध ही रहेगी, स्वार्थ रहता है, कट्टरपंथ भी रहेगा ही।