उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बचाने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का आज सातवां दिन है। रेस्क्यू टीम अब तक ध्वस्त सुरंग से सिर्फ 24 मीटर मलबा ही हटा पाई है। बचाव में मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स से संपर्क किया गया है। वह ऑनसाइट टीम की सहायता के लिए भारत आ रहे हैं।

वहीं गांव वाले इस सुरंग को लेकर कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। गांव वालों का कहना था, कि यहां टनल बनाए जाने के लिए बाबा बौखनाथ के मंदिर को तोड़ा गया था। आरोप है कि टनल निर्माण कंपनी ने मंदिर को तोड़ा, जिसकी वजह से प्रकोप यहां बरस रहा है। इसके बाद यहां फिर से बाबा बौखनथ मंदिर की स्थापना कर दी गई है।

एक तरफ बाचाव कार्य के लिए नई मशीनें लाई जा रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर सुरंग के मुहाने पर मंदिर स्थापित किया जा रहा है। पूजा-प्रार्थना का दौर चल रहा है।दरअसल, त्रासदी के बाद ग्रामीणों का मानना था कि सुरंग ढहने के पीछे स्थानीय देवता बाबा बौखनाग का प्रकोप था। ग्रामीणों ने कहा कि सुरंग बाबा बोखनाग के क्रोध के कारण ढह गई, क्योंकि निर्माण कार्य के कारण उनका मंदिर ध्वस्त कर दिया गया था।

ग्रामीणों का कहना था कि यहाँ बोखनाग का मंदिर बनाने से काम होगा।, अभी तक तो NHIDCL इगनोर कर रहा था, लेकिन ऑपरेशन टनल में अब तक फेल रहने के बाद NHIDCL मंदिर भी स्थापित करवा दिया।

इस सुरंग का निर्माण चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चारधाम ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा था। इसमें एक सुरंग बनाई गई थी, जिसका एक हिस्सा ढह गया। निर्माण कंपनी द्वारा मंदिर को ध्वस्त करने के कुछ दिनों बाद, सुरंग ढह जाने से 41 श्रमिक फंस गए। मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।