उत्तरकाशी टनल रेस्क्यू पर भारतीय सेना ने एक खास प्लान बनाया है। उत्तरकाशी के सिल्क्यारा में हुई सुरंग आपदा में फिलहाल भारतीय सेना पूरी तरह से शामिल नहीं है। साथ ही अभी तक सीमा सड़क संगठन वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए सड़कें बनाता रहा है।
ऐसा कहा जा रहा था कि सेना केवल रिफ्ट टनल बनाएगी। सेना सुरंग तभी बनाएगी जब मौजूदा प्लान ए और बी दोनों विफल हो जाएंगे। इस सुरंग को बनाने में सेना को कम से कम सात दिन का समय लगेगा। प्लान सी के तहत सेना द्वारा बनाई जाने वाली सुरंग 1200 मिमी की होगी।
आपको बता दें, कि उत्तराखंड की सिल्क्यारा-डंडलगांव सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए वर्टिकल ड्रिलिंग के साथ-साथ मैनुअल क्षैतिज खुदाई भी सोमवार 27 नवंबर से शुरू हो सकती है। 16 दिनों से फंसे 41 मजदूरों तक पहुंचने के लिए 86 मी. वर्टिकल ड्रिलिंग की जानी है। अब तक 31 मीटर की खुदाई हो चुकी है।
वहीं सोमवार की सुबह सिलक्यारा साइड में फंसी ऑगर मशीन को काटकर बाहर निकाला गया। रविवार 26 नवंबर की शाम से इसे प्लाज्मा कटर से काटा जा रहा था। ये काम पूरी रात चलता रहा। इस काम में भारतीय सेना कोर ऑफ इंजीनियर्स और मद्रास सैपर्स लगे हुए थे। सुबह सफलता मिलते ही ये लोग खुशी से उछल पड़े। अब इस स्थान से मैन्युअल ड्रिलिंग फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
अब इस ड्रिलिंग में 48 मीटर से ज्यादा की खुदाई मैन्युअली की जाएगी। इसके लिए 6 'रैट माइनर्स' की एक टीम को सिल्क्यारा बुलाया गया है। 'रैट माइनर्स' ने बताया कि वे एक छोटे फावड़े से बचाई गई पाइपलाइन के अंदर बारी-बारी से जाएंगे और एक बार में 6-7 किलो मलबा एक छोटी ट्रॉली में लोड करके बाहर लाएंगे। इस दौरान 'रैट माइनर्स' के पास ऑक्सीजन मास्क, आंखों की सुरक्षा के लिए विशेष चश्मा और पाइपलाइन के अंदर हवा प्रसारित करने के लिए ब्लोअर होंगे।