भोपाल। राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त ने जिला अस्पतालों में एनजीओ द्वारा स्थापित डायलिसिस मशीनों के रखरखाव की नई शर्तें निर्धारित कर दी गई हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में कुछ जिला अस्पतालों में राज्य शासन ने डायलिसिस मशीनें क्रय कर स्थापित की हैं तथा उनका रखरखाव एनजीओ के माध्यम से कराया जाता है लेकिन बहुत से जिला अस्पतालों में एनजीओ के माध्यम से ही डायलिसिस मशीनें क्रय कर स्थापित की गई हैं।

अब राज्य स्तर से निर्णय लिया गया है कि पूर्व से स्थापित एनजीओ द्वारा संचालित डायलिसिस ईकाईयों का संचालन स्थानीय स्तर पर पांच शर्तों के अधीन निरंतर किया जायेगा यथा एक, जिला चिकित्सालय/ सिविल अस्पताल में स्थापित एनजीओ अधिपत्य डायलिसिस मशीनों के संचालन एवं रख रखाव की समस्त जवाबदारी संबंधित एनजीओ की निर्धारित होगी।

दो, संचालन में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की जवाबदारी जिला स्तर पर जिला चिकित्सालय की रोगी कल्याण समिति अथवा संबंधित एनजीओ की निर्धारित होगी। तीन, संचालन हेतु वित्तीय व्यवस्था की जवाबदारी जिला स्तर पर जिला चिकित्सालय की रोगी कल्याण समिति अथवा संबंधित एनजीओ की निर्धारित होगी। जिला स्तर पर आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहीयों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ देते हुए डायलिसिस क्लैम किया जाना अनिवार्य होगा। चार, प्रत्येक डायलिसिस सत्र पर होने वाले व्यय राज्य द्वारा निविदा माध्यम से निर्धारित राशि से कम होनी चाहिए। पांच, चिकित्सालय/एनजीओ द्वारा एपीएल रोगियों से विभागीय स्तर से निर्धारित प्रति सत्र डायलिसिस शुल्क प्राप्त किया जायेगा।