भापाल। राज्य मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक विकास नरवाल ने प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में ले-आउट, तौलकांटे संस्थापना एवं अन्य पोस्ट हार्वेस्ट निर्माण, प्रोजेक्टस से संबंधित अधोसंरचनाओं के प्रस्ताव स्वीकृत करने के लिये नई प्रक्रिया निर्धारित कर दी है जिससे अब ये मंडी समितियां सीधे ऐसे प्रस्ताव मंडी बोर्ड मुख्यालय की प्रांगण सम्पदा शाखा में नहीं भेज पायेंगे।

नई व्यवस्था के अंतर्गत, अब मण्डी सचिव व उपयंत्री द्वारा सहायक यंत्री के सहयोग से कुल उपलब्ध भूमि का कृषि विपणन के प्रयोजन हेतु आवश्यक विषयों एवं सभी मदों में उपयोग के युक्तिसंगत बंटवारे का प्रस्ताव तैयार किया जाकर कृषि उपज मण्डी समिति को प्रस्ताव प्रस्तुत कर, ठहराव कराया जावेगा।

इसके बाद, कार्यपालन यंत्री तकनीकी संभाग व संयुक्त संचालक आंचलिक कार्यालय द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर से बिंदुबार क्षेत्र निर्धारण उपयोग हेतु आधार सहित अनुशंसित कर अभिलेख प्रमाण सहित पूर्ण प्रस्ताव बोर्ड मुख्यालय अधीक्षण यंत्री के पास भेजा जाएगा। फिर अधीक्षण यंत्री निर्माण शाखा द्वारा प्राप्त प्रस्ताव का बोर्ड के निर्धारित मानदंडों के अनुरूप परीक्षण कर, उपयुक्त होने पर अपने अभिमत, आधार सहित प्रस्ताव अपर संचालक (प्रांगण/सम्पदा) को प्रेषित किया जाएगा। अपर संचालक प्रांगण/सम्पदा द्वारा अपनी शाखा से परीक्षण कराकर, बोर्ड की नीति अनुरूप प्रस्ताव होने पर प्रबंध संचालक को अनुमोदन हेतु प्रस्तावित किया जावेगा। प्रबंध संचालक के अनुमोदन उपरान्त संबंधित कृषि उपज मण्डी समिति में प्रस्ताव प्रस्तुत कर लागू किया जाएगा।