भोपाल। राज्य सरकार ने नगरों की नजूल भूमि पर 31 दिसम्बर 2014 या उसके पूर्व काबिज लोगों को भू-अधिकार देने के संबंध में नये प्रावधान जारी कर दिये हैं।

दरअसल 31 दिसम्बर 2014 तक काबिज लोगों को मप्र नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति पट्टाधृति अधिकारों का प्रदान किया जाना कानून 1984 के तहत स्थाई एवं अस्थाई पट्टे दिये गये थे, परन्तु इसके बावजूद भी ऐसे अनेक व्यक्ति रह गये थे जिन्हें उक्त कानून के अंतर्गत पात्रता नहीं होने के कारण कोई पट्टा नहीं दिया जा सका था। इसीलिये 24 सितम्बर 2020 को राज्य सरकार ने निर्देश जारी कर ऐसे छूटे हुये लोगों को प्रीमीयम एवं भू-भाटक लेकर उपयोग किये जा रहे भूखण्ड को 30 वर्ष के पट्टे पर दिये जाने हेतु नया परिपत्र जारी किया था। इस परिपत्र के अनुसार, ऐसे व्यक्तियों को जिला कलेक्टरों को आवेदन करना होगा तथा कलेक्टर जांच के बाद काबिज व्यक्ति को 30 दिन के अंदर निर्धारित प्रीमीयम एवं भू-भाटक जमा करने के लिये कहेगा। राशि जमा होने पर पट्टा जारी कर दिया जायेगा। लेकिन इस संबंध में अब नया प्रावधान कर दिया गया है कि यदि 30 दिन में निर्धारित प्रीमीयम एवं भू-भाटक जमा नहीं किया जाता है तो उसे बकाया भू-राजस्व मानकर रेवेन्यु रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया जायेगा।

इसी प्रकार, अब मिश्रित उपयोग (आवासीय एवं वाणिज्यिक) वाले भूखण्डों के बारे में भी नया प्रावधान जारी कर दिया गया है जिसके तहत आवासीय अंश के भाग की गणना आवासीय प्रयोजन अनुसार किया जायेगा तथा वाणिज्यिक अंश की गणना आवासीय प्रयोजन की दरों का 120 प्रतिशत के बराबर की जायेगी।

एक नया प्रावधान यह भी किया गया है कि जहां एक परिवार द्वारा दो अलग-अलग भूखण्डों में से एक का आवासीय व दूसरे का वाणिज्यिक प्रयोजन में उपयोग किया जा रहा है तो ऐसे मामलों में दो पृथक-पृथक पट्टे प्रदान किये जायेंगे तथा ऐसे प्रकरणों में परिवार को एक बार ही लाभ दिया जाये।