भोपाल: कटनी जिले झिन्ना खदान के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने कटनी कलेक्टर, वन विभाग और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।

दरअसल, झिन्ना और हर्रैया वन ​भूमि हैं, लेकिन अफसर इसे राजस्व की जमीन करार देने पर तुले हुए हैं। इसे लेकर भोपाल के पर्यावरणविद संतोष उपाध्याय एनजीटी गए थे। इस आवेदन में उठाया गया मुद्दा वनों की कटाई और पेड़ों की कटाई/अवैध कटाई और गैर-अनुपालन और उल्लंघन है। 

वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 का उल्लंघन, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के टी.एन. शीर्षक के फैसले में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन है। अवैध खनन और पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन, जैव विविधता का विनाश और जैविक विविधता अधिनियम, 2002 का उल्लंघन, वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1981 का उल्लंघन है।  

संतोष उपाध्याय ने यह तर्क दिया गया है कि खसरा संख्या 30, 34, 34/4, 34/2, 35, 36, 37, 38, 265, 267 और 320 के रूप में पहचानी गई वन भूमि महत्वपूर्ण और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह भूमि न केवल एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संपत्ति है, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का भी हिस्सा है, जो स्थानीय जैव विविधता को बनाए रखने, जल चक्रों को विनियमित करने और कार्बन सिंक को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  

क्या है मामला ..

ढीमरखेड़ा के वन क्षेत्र ग्राम झिन्ना की 48.562 हेक्टेयर भूमि को लेकर यह पूरा मामला है। करीब 120 एकड़ की इस वन जमीन पर कटनी के खनन कारोबारी आनंद गोयनका की गिद्ध नजर है। इसी मामले को संतोष उपाध्याय ने पिछले दिनों शिकायत की थी। उपाध्याय का आरोप है कि खनन कारोबारी आनंद गोयनका मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका को मध्यप्रदेश की तत्कालीन दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में 1994 से 2014 तक की अवधि के लिए 48.562 हेक्टेयर जमीन पर खनन करने का पट्टा मिला था। खनिज पट्टा आवंटित होने के पीछे बहुत कुछ छिपा है। 

दरअसल सरकार ने ग्राम झिन्ना के वन क्षेत्र की 48.562 हेक्टेयर जमीन का पुराना खसरा नम्बर 310, 311, 313, 314/1, 314/2, 315, 316, 317, 318, 265, 320 में खनिज के लिए 1 अप्रैल 1991 में 1994 से लेकर 2014 तक की अवधि के लिए निमेष बजाज के पक्ष में खनिज पट्टा स्वीकृत किया था। वर्ष 1999 में खनिज विभाग के आदेश से 13 जनवरी 1999 को उक्त खनिज पट्टा मेसर्स सुखदेव प्रसाद गोयनका प्रोप्राइटर आनंद गोयनका के पक्ष में हस्तांतरित किया गया। साल 2000 में वन मंडल अधिकारी कटनी के पत्र के आधार पर कटनी कलेक्टर ने आदेश पारित कर लेटेराइट फायर क्ले और अन्य खनिज के खनन पर रोक लगा दी थी। 

यह है पूरी कहानी..

वर्ष 2019-19 में एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक- /01अ-19(4)/2018-19 में पारित आदेश दिनांक 18-9-2019 के अंतर्गत उल्लेख किया गया कि वादग्रस्त भूमि खसरा नम्बर 320 वर्ष 1906 से 1951 तक मालगुजारी की जमीन नहीं थी। एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा पारित आदेश दिनांक 18-07-2008, 18-10-2011 और 18-09-2019 को पारित प्रत्येक आदेश में उक्त भूमि को वन भूमि मानने से इंकार किया। जिसे कलेक्टर कटनी द्वारा अपने आदेश दिनांक 4 मार्च 2010, 19 मार्च 2013 और 19 दिसम्बर 2019 के माध्यम से एसडीएम ढीमरखेड़ा (वन व्यवस्थापन अधिकारी) द्वारा पारित आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई।