प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक को आज दोपहर साढ़े तीन बजे टेरर फंडिंग मामले में सजा सुनाई जाएगी। दिल्ली की NIA कोर्ट ने सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। कहा जाता है कि NIA ने यासीन मलिक के लिए मौत की सजा की मांग की है। इससे पहले गुरुवार को कोर्ट ने उन्हें टेरर फंडिंग के एक मामले में दोषी ठहराया था। यासीन मलिक ने सुनवाई के दौरान कबूल किया कि वह कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल था।
#WATCH | Terror funding case: Yasin Malik produced before NIA Court in Delhi. He was convicted by the NIA Court on May 19th. pic.twitter.com/0KVrcxHYV2
— ANI (@ANI) May 25, 2022
इससे पहले यासीन मलिक को दिल्ली की पटियाला कोर्ट में पेश किया गया। यहां सजा पर कोर्ट में लंबी चर्चा हुई। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। पटियाला कोर्ट परिसर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पटियाला कोर्ट के बाहर सीएपीएफ, स्पेशल सेल के जवानों को तैनात किया गया है।
सजा पर कुछ नहीं बोले, यासीन मलिक-
अदालत कक्ष में मौजूद वकील फरहान ने कहा कि यासीन मलिक ने अदालत में कहा था कि वह सजा पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। कोर्ट को उन्हें खुलकर सजा देनी चाहिए। मलिक ने कहा, मुझे कोई सजा नहीं होगी। वहीं, एनआईए ने यासीन मलिक को फांसी देने की मांग की। इसके बाद यासीन मलिक 10 मिनट तक चुप रहा। यासीन मलिक ने अदालत से कहा, जब भी मुझसे कहा गया, तब मैंने आत्मसमर्पण कर दिया। बाकी कोर्ट को जो ठीक लगे वो उसके लिए तैयार है।
अदालत ने ठहराया दोषी-
अदालत ने कहा कि यासीन मलिक ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए धन जुटाने के लिए "आजादी" के नाम पर एक विश्वव्यापी नेटवर्क स्थापित किया था। एनआईए ने 30 मई, 2017 को मामला दर्ज किया। इस मामले में 18 जनवरी 2018 को एक दर्जन से ज्यादा लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों ने पाकिस्तान की आईएसआई के समर्थन से भारत में नागरिकों और सुरक्षा बलों पर बड़े पैमाने पर हमले किए।
यासीन मलिक ने कबूला गुनाह-
यासीन मलिक ने अदालत को बताया कि वह धारा 16 (आतंकवादी गतिविधि), 17 (आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने), 18 (आतंकवादी कृत्यों को करने की साजिश) और 20 (एक आतंकवादी समूह या संगठन का सदस्य होने के नाते) का दोषी था। लेकिन अब वह यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 124-ए (देशद्रोह) के तहत अपने खिलाफ लगें आरोपों को चुनौती नहीं देना चाहता हैं।
आजीवन कारावास या फांसी?
अदालत के फैसले के बाद ही यासीन मलिक को पता चलेगा कि उसके अपराध के लिए उसे कितनी सजा दी जाएगी। हालांकि, इन मामलों में मलिक को अधिकतम मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। जबकि आजीवन कारावास की न्यूनतम सजा तय मानी जाती है।