बिहार की राजनीति में अब लगभग यह तय हो गया है कि नीतीश कुमार का एनडीए से मोहभंग हो गया है और वह महागठबंधन में शामिल होने जा रहे हैं। मंगलवार सुबह से ही जदयू और महागठबंधन की अलग-अलग बैठकें चल रही हैं। अब नीतीश कुमार ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौप दिया है और नई सरकार बनाने के लिए राजद सहित अपने सभी महागठबंधन के सहयोगियों के साथ कदमचाल चलने लगे हैं।
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क्यों 2017 में महागठबंधन से नीतीश हुए थे अलग-
ऐसा ही एक राजनीतिक ड्रामा जुलाई 2017 में भी खेला गया था। बहुत उथल-पुथल के बाद, नीतीश कुमार ने आखिरकार 26 जुलाई, 2017 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और महागठबंधन से नाता तोड़ लिया था। जिसके बाद उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर नई सरकार बनाई थी। तब भी नीतीश कुमार ने सत्तारूढ़ राजद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
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26 जुलाई 2017 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश ने क्या कुछ कहा था? जानिए...!
→ मैंने अब राज्यपाल से मिलने के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
→ हमने 20 महीने से अधिक समय तक महागठबंधन की सरकार चलाई।
→ जहां तक संभव हुआ, हमने गठबंधन के सिद्धांत का पालन करते हुए चुनाव के दौरान बिहार की जनता से किए गए वादों को पूरा करने की कोशिश की। लेकिन महागठबंधन सरकार में यह संभव नहीं हो पाया।
→ हमने बिहार में सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी।
→ बिहार में लागू हुआ शराबबंदी।
→ पहले जो भी काम चल रहा था, चाहे वह कृषि विकास हो या ढांचागत विकास (सड़कों, पुलों का निर्माण), बिजली हो या कल्याणकारी योजनाएँ, हमने सबके लिए काम किया।
→ 20 महीने पूरे हो गए हैं, लेकिन अब स्थिति बदल गई है, ऐसे माहौल में काम करना मेरे लिए संभव नहीं है।
→ मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर इस्तीफा सौंप दिया।
→ मैंने किसी का इस्तीफा नहीं मांगा। हमने अच्छा काम करने की पूरी कोशिश की, लेकिन महागठबंधन सरकार में यह संभव नहीं हो पाया।
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