यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार इतना बड़ा कदम उठाने के संकेत दे रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए के पीएम उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा के विरोध में नीतीश कुमार ने भी भाजपा से नाता तोड़ लिया था और महागठबंधन में शामिल हो गए थे। हालांकि, दो साल बाद, 2017 में उन्होंने महागठबंधन छोड़ दिया और एनडीए में वापसी कर ली थी।
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बिहार में नवंबर 2020 में विधानसभा चुनाव हुए थे। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी। लेकिन अब 21 महीने बाद भी बिहार में राजनीतिक रूप से सब कुछ ठीक नहीं है। क्योंकि नीतीश कुमार की जदयू और बीजेपी का गठबंधन टूटने वाला है। इतना ही नहीं नीतीश कुमार राजद, लेफ्ट और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना सकते हैं। इसके लिए विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं।
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विपक्षी दलों के खेमे में भी बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। नीतीश कुमार बीजेपी के पुराने सहयोगी माने जाते रहें रहे हैं। इन 22 सालों में नीतीश कुमार दो बार लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी से नाता तोड़ चुके हैं। खास बात यह है कि नीतीश कुमार ने आखिरी बार 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी से नाता तोड़ लिया था। अब एक बार फिर नीतीश कुमार 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ये कदम उठाने जा रहे हैं।
बिहार विधानसभा में नंबर गेम-
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं। इनमें से एक सीट खाली है। फिलहाल राजद के पास सबसे ज्यादा 79 विधायक हैं। वहीं, बीजेपी के पास 77, जदयू के 45, कांग्रेस के 19, लेफ्ट के 16 विधायक हैं। जदयू राज्य की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। 2020 में कम सीटों के बावजूद बीजेपी ने नीतीश कुमार को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन अब चर्चा है कि नीतीश कुमार बीजेपी से गठबंधन तोड़कर राजद, कांग्रेस और लेफ्ट के साथ सरकार बना सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो महागठबंधन को आसानी से बहुमत मिल जाएगा। साथ ही भाजपा विपक्ष की भूमिका में चली जाएगी।
नीतीश ने कब-कब छोड़ा बीजेपी का साथ?
यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार इतना बड़ा कदम उठाने के संकेत दे रहे हैं। इससे पहले नीतीश कुमार ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को एनडीए का पीएम उम्मीदवार घोषित किए जाने के विरोध में बीजेपी से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद लोकसभा चुनाव में जदयू का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, पार्टी सिर्फ 2 सीटें ही जीत पाई थी। एक बार फ़िर उसी कदम पर नीतीश कुमार चलते नज़र आ रहे है।
लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार का मोहभंग-
1. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार बीजेपी से अलग होकर महागठबंधन में शामिल हो गए थे।
2. 2019 लोकसभा से डेढ़ साल पहले यानी 2017 में नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे।
3. अब जब पार्टियों ने 2024 की तैयारी शुरू कर दी है तो नीतीश कुमार ने एक बार फिर बीजेपी से अलग होने का मन बना लिया है।
पहली बार सिर्फ 7 दिन रहे सीएम-
साल 2000 में नीतीश कुमार पहली बार मुख्यमंत्री बने। तब जदयू और बीजेपी गठबंधन को 151 सीटें मिली थीं। हालांकि, 324 सीटों वाले राज्य में बहुमत के लिए 163 सीटों की जरूरत थी। नीतीश कुमार ने महसूस किया कि वह बहुमत साबित नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। तब वह सिर्फ़ 7 दिनों तक सीएम रहे थे।
1. 2005 में सत्ता में वापसी- नीतीश कुमार 2005 में सत्ता में लौटे।
2. वह भाजपा के साथ गठबंधन में बहुमत हासिल करने में सफल रहें। उन्होंने अपना कार्यकाल 2010 तक पूरा किया।
3. 2010 में जनता ने एक बार फिर नीतीश कुमार पर भरोसा जताया। उन्होंने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
4. 2014 में, नीतीश कुमार ने लोकसभा में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था।
साल 2014 के लोकसभा चुनावों में एनडीए से अलग होने और करारी हार के बाद नीतीश कुमार ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और जीतन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया था। फरवरी 2015 में जीतनराम मांझी ने नीतीश कुमार से नाराज होकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में उन्होंने जदयू छोड़ दिया और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा नाम से अपनी पार्टी बनाई। जिसके बाद जीतनराम मांझी एनडीए में चले गए। बाद में, उन्होंने एनडीए छोड़ दिया और महागठबंधन में शामिल हो गए, लेकिन अधिक वोट प्राप्त करने के बाद एनडीए में फिर से शामिल हो गए थे।