मद्रास हाईकोर्ट ने बकरीद से एक दिन पहले तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य में बकरीद या किसी अन्य दिन गाय और बछड़ों की कुर्बानी न हो। जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की बेंच ने कहा कि संविधान सभा की बहस में कहा गया था कि गाय भारत में पूजनीय मानी जाती है और भगवान कृष्ण के समय से हमारी संस्कृति का हिस्सा रही है। कई मुस्लिम शासकों ने भी गोहत्या पर रोक लगाई थी। महात्मा गांधी भी गो संरक्षण को बहुत महत्वपूर्ण मानते थे।

इंदु मक्कल कच्ची के राज्य महासचिव सूर्य ने हाईकोर्ट में कुर्बानी के खिलाफ याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा था कि सार्वजनिक जगहों पर अवैध रूप से गायों की कटाई की जा रही है। इसे रोकने के लिए 18 मई को प्रशासन को ज्ञापन भी दिया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 48 का हवाला दिया

कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 48 राज्य सरकार को गाय, बछड़ों और दुधारू-पशुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का निर्देश देता है। कोर्ट ने तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट, 1958 की धारा-4 का उल्लेख किया।इसमें कहा गया है कि 10 साल से ज्यादा उम्र और प्रजनन के अयोग्य पशु को ही प्रमाणपत्र मिलने के बाद काटा जा सकता है। अदालत ने कहा कि इस प्रावधान की सख्ती से व्याख्या होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इनकार किया था

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गायों की हत्या पर रोक लगाने और गोवंश वध कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े मुद्दे को आखिरी समय पर उठाया गया है, इसलिए अभी तुरंत सुनवाई की जरूरत नहीं है।

याचिकाकर्ता ने कहा था कि बकरीद नजदीक है, इसलिए मामले की जल्दी सुनवाई होनी चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या आप त्योहार से ठीक पहले सिर्फ प्रचार पाने के लिए कोर्ट आए हैं?