भोपाल: राज्य के आयुष विभाग ने ग्यारह साल बाद नियम बदल दिये हैं तथा प्राचार्य के 25 प्रतिशत पदों पर अन्य राज्यों में स्थित प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वानों से भरे जाने का प्रावधान कर दिया है। इससे पहले ये पद पदोन्नति से ही भरे जाने का प्रावधान था।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सात स्वशासी आयुर्वेद कालेज भोपाल, बुरहानपुर, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, रीवा एवं उज्जैन में स्थित हैं जबकि स्वशासी होम्योपैथी एवं यूनानी के भोपाल में 1-1 कालेज हैं। इन सभी नौ कालेजों में शिक्षकीय संवर्ग की भर्ती हेतु ग्यारह साल पहले मप्र स्वशासी शासकीय आयुर्वेद, होम्योपैथी एवं यूनानी महाविद्यालय एवं चिकित्सालय सेवा शिक्षकीय संवर्ग भरती नियम 2010 बनाये गये थे। लेकिन अब इन नियमों को निरस्त कर नये नियम बनाकर प्रभावशील कर दिया गया है। नये नियमों में ईडब्ल्युएस वर्ग को भी आरक्षण दिया गया है।
नये नियमों के अनुसार, इन नौ कालेजों में प्रथम श्रेणी के पदों के अंतर्गत प्राचार्य के नौ, प्रोफेसरों के 131, रीडर के 145 तथा द्वितीय श्रेणी के पदों के अंतर्गत व्याख्याता के 180 पद होंगे। प्राचार्य के 75 प्रतिशत पद पदोन्नति द्वारा भरे जायेंगे जबकि शेष 25 प्रतिशत पद अन्य राज्यों में स्थित प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वानों से भरे जायेंगे। प्रोफेसरों और रीडरों के 75 प्रतिशत पद पदोन्नति द्वारा एवं शेष 25 प्रतिशत सीधी भर्ती द्वारा भरे जायेंगे। व्याख्याताओं के सभी पद सीधी भर्ती से भरे जायेंगे। ग्यारह साल पहले प्राचार्य के तो नौ ही पद थे परन्तु प्रोफेसरों के 115, रीडर के 144 तथा व्याख्याता के 208 पद थे।
इसी प्रकार, पहले प्रोफसर बनने के लिये अधिकतम आयु 45 वर्ष, रीडर के लिये 40 वर्ष तथा व्याख्यता के लिये 35 वर्ष थी परन्तु अब बदलाव कर प्रोफसर बनने के लिये अधिकतम आयु 50 वर्ष, रीडर बनने के लिये 45 वर्ष तथा व्याख्याता बनने के लिये 40 वर्ष कर दी गई है। सिर्फ बाहर से प्रतिनियुक्ति पर प्राचार्य बनाने हेतु अधिकतम आयु 55 वर्ष निर्धारित की गई है।