भोपाल: प्रदेश में अब एक हजार वर्गफीट यानि 105 मीटर तक के भूखण्ड पर आवास बनाने के लिये स्थानीय निकाय की मंजूरी के लिये लोगों को चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे तथा उनके द्वारा नगरीय निकाय में सिर्फ शपथ-पत्र देने पर इसकी तुरन्त स्वीकृति मिल जायेगी।
यह नया प्रावधान राज्य के नगरीय प्रशासन विभाग ने मप्र भूमि विकास नियम 2012 में कर दिया है तथा बिल्डिंग परमीशन का यह नया प्रावधान 31 अगस्त के बाद पूरे प्रदेश में लागू हो जायेगा।
नये प्रावधान के अंतर्गत, व्यक्ति को शपथ-पत्र भी किसी स्टाम्प पेपर पर नहीं देना होगा और सिर्फ स्वप्रमाणित कर वह इसे दे सकेगा। यह व्यवस्था टीएनसीपी द्वारा अप्रूव्ड ले आउट एवं न्ररीय निकाय द्वारा जारी विकास अनुज्ञा वाले भूखण्डों पर लागू होगा।
ऐसी तुरन्त स्वीकृति ऐसे कालोनाईजरों, को जो भू-खण्ड/फ्लेट/भवन के विक्रय का आशय रखते हैं, जारी नहीं की जायेगी तथा सिर्फ व्यक्तिगत भूखण्ड धारक को ही यह सुविधा मिलेगी। शपथ-पत्र से तुरन्त स्वीकृति निर्धारित शुल्क अदा करने पर ही मिलेगी।
स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण की कार्यपूर्णता के प्रमाणस्वरुप इसकी लिखित सूचना देनी होगी। नये प्रावधान में कहा गया है कि तुरन्त स्वीकृति के लिये दिये शपथ-पत्र के साथ दिये निर्धारित शुल्क को प्राप्त करते समय नगरीय निकाय द्वारा किसी प्रकार का निरीक्षण/दस्तावेज परीक्षण नहीं किया जायेगा किन्तु अपूर्ण दस्तावेज अथवा अन्य कोई जानकारी को बाद में प्राप्त किया जा सकेगा। शुल्क सहित आवेदन-पत्र तथा शपथ-पत्र का प्रस्तुत किया जाना, स्वत: डीम्ड स्वीकृति माना जायेगा।