प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में अब उपजों के जैविक होने या न होने की एन्ट्री अनिवार्य रुप से की जायेगी। इसके लिये राज्य मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक विकास नरवाल ने सभी मंडी सचिवों को निर्देश जारी कर दिये हैं।
जारी निर्देश में कहा गया है कि प्रदेश मे उत्पादित कृषि उपज का मण्डी प्रांगण मे विक्रय के समय प्रवेश पर्ची, अनुबंध पर्ची तथा भुगतान पत्रक पर वैरायटी दर्ज किये जाने के निर्देश प्रसारित किये गये हैं। उक्त क्रम में प्रदेश मे प्राकृतिक रूप से उत्पादित जैविक कृषि उपज की विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता प्रतीत हो रही है ताकि ऐसे जैविक कृषि उपज उत्पादको को प्रतिस्पर्धी मूल्य प्राप्त हो सके। इसके लिए ऐसी जैविक कृषि उपज की, मण्डियों मे आवक एवं विक्रय होने पर, ई-अनुज्ञा पोर्टल पर जैविक होने की अनिवार्य प्रविष्टि किये जाने का निर्णय लिया गया है।
प्रबंध संचालक ने कहा है कि मण्डी सचिवों के द्वारा अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियो को जैविक कृषि उपज की मैपिंग के महत्व को समझाते हुए उन्हे ई-अनुज्ञा पोर्टल पर भुगतान पत्रक मे कृषि उपज के जैविक होने/नहीं होने की प्रविष्टि हेतु सहमति बनायी जाये। जब तक व्यापारियों के द्वारा ई-अनुज्ञा पोर्टल पर उक्त प्रविष्टि करने की व्यवस्था पूर्ण रूप से प्रभावशील नहीं हो जाती है, तब तक मण्डी सचिव द्वारा ई-अनुज्ञा पोर्टल पर व्यापारी/मण्डी द्वारा दर्ज भुगतान पत्रक के सत्यापन के समय समस्त विक्रय संव्यवहारो में कृषि उपज की जैविक होने/नहीं होने की प्रविष्टि करना अनिवार्य होगा।
बना प्रापर्टी मेनेजमेंट साफ्टवेयर :
राज्य मंडी बोर्ड ने कृषि उपज मंडियों के लिये प्रापर्टी मेनेजमेंट साफ्टवेयर तैयार किया है। मंडी सचिवों से कहा गया है कि प्रदेश की समस्त कृषि उपज मंडी समितियों में प्रापर्टी मैनेजमेंट के डेटा को उपलब्ध साफ्टवेयर प्रोग्राम में लगातार अद्यतन प्रविष्टि तथा शुद्ध करते रहने के लिये एक सक्षम कर्मचारी को नोडल नियुक्त किया जावे। मंडी सचिव द्वारा प्रविष्टि की गई जानकारी का समयबद्ध सत्यापन कर सुधार किया जाकर जानकारी सेव कर फारवर्ड की जावे। इसी प्रकार आंचलिक कार्यालय स्तर भी एक नोडल अधिकारी/कर्मचारी नियुक्त किया जावे।