भोपाल: प्रदेश में कृषि विभाग के अंतर्गत गठित 259 कृषि उपज मंडी समितियों का नया वर्गीकरण तय किया गया है। नये वर्गीकरण के तहत, अब मंडी में आने वाली अधिसूचित फसलों की सालाना आवक भी मानदण्ड होगी। अब ए क्लास की मंडी वह होगी जिसकी सालाना आय 3 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक के स्थान पर छह करोड़ रुपये से अधिक होगी और उसकी पिछले तीन सालों में वार्षिक आवक ढाई लाख मीट्रिक टन से अधिक होगी। इसी प्रकार, बी क्लास की मंडी वह होगी जिसकी सालाना आय 2 करोड़ रुपये से अधिक परन्तु साढ़े तीन करोड़ रुपये तक के स्थान पर 3 करोड़ रुपये से अधिक किन्तु 6 करोड़ रुपये तक होगी और गत तीन वर्ष में वार्षिक आवक सवा लाख मीट्रिक टन से अधिक किन्तु ढाई लाख मीट्रिक टन तक होगी। सी क्लास मंडी वह होगी जिसकी सालाना आय 1 करोड़ रुपये से अधिक किन्तु 2 करोड़ रुपये तक के स्थान पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक किन्तु 3 करोड़ रुपये तक होगी एवं गत तीन सालों में वार्षिक आवक 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक किन्तु सवा लाख मीट्रिक टन तक होगी। डी क्लास की मंडी वह होगी जिसकी सालाना आय 1 करोड़ रुपये तक के स्थान पर 1 करोड़ 50 लाख रुपये तक होगी एवं विगत तीन सालों में वार्षिक आवक पचास हजार मीट्रिक टन तक होगी। नये वर्गीकरण में स्पष्ट किया गया है कि चालू वित्त वर्ष के लिये कोई भी मंडी निम्नतर वर्ग में वर्गीकृत नहीं की जायेगी।
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अब ए क्लास मंडी की वार्षिक आय छह करोड़ सालाना से अधिक होना जरुरी होगा
नये वर्गीकरण के तहत, अब मंडी में आने वाली अधिसूचित फसलों की सालाना आवक भी मानदण्ड होगी..!!