भोपाल: पन्ना नेशनल पार्क के बाद अब 2133 वर्ग किलोमीटर में फैले सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की निगरानी ड्रोन के जरिए होगी. पार्क के संचालक कृष्णमूर्ति ने ड्रोन के संचालन के लिए एक दल गठित किया है. यह दल ड्रोन के जरिए आगजनी की घटनाओं पर नजर रखेगा. इसके अलावा ड्रोन के जरिए वाटर होल, आवास, चारागाह और जैविक दबाव की भी मानिटरिंग होगी.
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में ड्रोन दस्ता का लीडर फॉरेस्ट गार्ड भगवानदास सागर को बनाया गया है. इस दस्ते में प्रभारी रेंजर रंजन सिंह और पर्वत पासी भी शामिल है. ड्रोन दस्ते की पहली प्राथमिकता जंगलों में लगने वाली आग की घटनाएं हैं. ड्रोन के माध्यम से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 1 अप्रैल 5 अप्रैल की आग की घटनाओं का फोटो कैप्चर किया गया. तत्काल मैदानी अमले को घटनास्थल पर भेज कर आग पर काबू पा लिया गया.
कैसे काम करेगा ड्रोन दल:
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 122 बीट है. इतने बड़े एरिया पर निगरानी के लिए रोस्टर सिस्टम तैयार किया है. यह दल प्रत्येक दिन रोस्टर के अनुसार 5 वर्ग किलोमीटर जंगलों में ड्रोन उड़ा कर हर गतिविधियों की फोटो कैप्चर कर उसे कंट्रोल रूम को फॉरवर्ड करता है. सतपुरा टाइगर रिजर्व के संचालक कृष्णमूर्ति ने एक रजिस्टर भी बनाया हुआ है. इस रजिस्टर में टीम लीडर ड्रोन द्वारा कैप्चर किए गए तस्वीरों का ब्यौरा दर्ज करता है.
क्या है ड्रोन की विशेषता:
यह ड्रोन 500 मीटर ऊंचाई तक उड़ सकता है. जंगलों की निगरानी के लिए इसे 300 से 400 मीटर तक उड़ाया जा रहा है. ड्रोन के सामने पेड़ आने पर ऑटोमेटिक वह साइड से आगे का रास्ता तय करने लगता है. यही नहीं जब अंधेरे में ड्रोन दिखाई नहीं देता तब टीम लीडर 'रिटर्न टू होम' का बटन दबा देते हैं तो वह स्वयं वापस भी आ जाता है.
इनका कहना:
प्रदेश के जंगलों में लग रही आपको देखते हुए तत्काल ड्रोन दल का गठन किया है. ड्रोन के जरिए आगजनी की घटनाओं के साथ-साथ जंगलों की हर गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं.
"एल कृष्णमूर्ति, फील्ड डायरेक्टर सतपुड़ा"