भोपाल: प्रदेश के जिला अस्पतालों में सीएमएचओ और सिविल सर्जन का प्रभार मनमर्जी से नहीं दिया जा सकेगा बल्कि इसके स्थान पर नये दिशा-निर्देशों के अनुसार ही यह प्रभार सौंपा जा सकेगा। ये नये दिशा-निर्देश राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने जारी कर दिये हैं।

इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों से स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी /सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक का पद 100 प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने का प्रावधान है। वर्ष 2016 से पदोन्नति का प्रकरण उच्चतम न्यायालय में प्रचलित होने के कारण पदोन्नति की प्रक्रिया विलंबित होने के कारण इन पदों पर पदोन्नति नहीं की जा सकी है । इसलिए इन पदों पर समकक्ष अधिकारी को प्रभार सौंपे जाने हेतु प्रशासकीय स्तर पर निर्णय लिये जा रहे हैं। इसलिये अब ये प्रभार नवीन दिशा-निर्देशों के तहत दिये जा सकेंगे।

ये हैं नये दिशा-निर्देश :

एक, भविष्य में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अथवा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक का पद रिक्त होने पर शासन स्तर/संचालनालय द्वारा पदस्थापना किये जाने तक जिला कलेक्टर अपने स्तर पर प्रभार बाबत अंतरिम व्यवस्था करेंगे। दो, सीएमएचओ के पद का प्रभार जिले में पदस्थ वरिष्ठतम विशेषज्ञ/डीएचओ को ही दिया जावे। दोनों संवर्ग के अधिकारियों की परस्पर वरिष्ठता तय करते समय सहायक शल्य चिकित्सक सवंर्ग में प्रथम नियुक्ति को ध्यान में रखा जाये। तीन, सिविल सर्जन का प्रभार जिला अस्पताल में पदस्थ वरिष्ठतम विशेषज्ञ को दिया जाये।

चार, वरिष्ठता क्रम निम्नलिखित परिस्थितियों में ही तोड़ा जा सकता है : शारीरिक विकलांगता के कारण वरिष्ठतम चिकित्सक उक्त पद पर कार्य करने की स्थिति में न हो, उन्हें सेवानिवृत्त होने में छ: माह शेष हों, गंभीर आरोपों पर से चिकित्सक के विरूद्ध विभागीय जांच /अपराधिक मामले प्रचलित हों। ऐसी स्थिति में प्रभार अगले वरिष्ठतम चिकित्सक को ही दिया जाये।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि उपरोक्त परिस्थितियों के अतिरिक्त, यदि कलेक्टर यह महसूस करते हैं कि ऐसे अन्य कोई कारण विद्यमान हैं, जिसकी वजह से वरिष्ठतम चिकित्सक को प्रभार नहीं दिया जा सकता है तब कलेक्टर संपूर्ण परिस्थिति दर्शाते हुए अपना स्पष्ट प्रस्ताव तत्काल संचालनालय को भेजेंगे और संचालनालय की लिखित अनुमति के बाद ही वरिष्ठता क्रम को त्यागते हुए किसी अन्य चिकित्सक को प्रभार दिया जा सकेगा।