भोपाल: मप्र विधानसभा द्वारा गत बजट सत्र में पारित वित्त विधेयक को राज्यपाल ने मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे अब राज्य सरकार पांच साल तक बाजार से ज्यादा कर्ज ले सकेगी।

उल्लेखनीय है कि मप्र राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम 2005 में प्रावधान था कि सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत के बराबर ही राजस्व घाटा रखा जा सकेगा। लेकिन पिछले दो सालों में कोरोना महामारी के कारण राज्य सरकार को काफी धनराशि व्यय करना पड़ी है इसलिये राजस्व घाटा कम करने के लिये राज्य सरकर जमकर बाजार से कर्ज ले रही है। उसे जीएसटी के कारण भी घाटा उठाना पड़ रहा है क्योंकि इसमें कर वृध्दि केंद्र सरकार ही करती है।

इस घाटे को कम करने के लिये केंद्र सरकार कई बार निर्धारित सीमा से अधिक कर्ज लेने की भी स्वीकृति प्रदान करती है परन्तु मप्र के राजकोषीय अधिनियम में इसका प्रावधान नहीं था जो अब संशोधन के जरिये नये वित्त अधिनियम में कर दिया गया है।

वित्त अधिनियम में मप्र हाईस्पीड डीजल उपकर एक्ट 2018 के प्रावधान को भी बदला गया है। पहले इस उपकर की राशि सिर्फ परिवहन अधोसंरचनाओं में ही व्यय करने का प्रावधान था परन्तु अब इसमें ग्रामीण आवास योजना के क्रियान्वयन में भी व्यय किया जा सकेगा।