भोपाल: भारत रत्न नानाजी देशमुख वेटनरी साईंस विवि जबलपुर में अब कुलपति पांच वर्ष तक पदस्थ रह सकेंगे। यही नहीं, पांच वर्ष बाद कुलपति को पुन: और पांच वर्ष के लिये नियुक्त किया जा सकेगा, बशर्ते उनकी आयु 70 वर्ष से अधिक न हो। कुल मिलाकर कुलपति दस वर्ष से अधिक के लिये नियुक्त नहीं हो सकेगा।

उक्त नया प्रावधान उक्त विवि के अधिनियम में संशोधन प्रभावी होने से लागू हो गया है। दरअसल नानाजी देशमुख वेटनरी साईंस एक्ट 2009 में संशोधन करने के लिये विधानसभा के गत शीतकालीन सत्र में 23 दिसम्बर 2021 को विधेयक पारित किया गया था जिसे अब राज्यपाल मंगु भाई पटेल द्वारा स्वीकृति देने के कारण यह संशोधन प्रभावशील हो गया है।

दरअसल पहले एक्ट में प्रावधान था कि कुलपति चार वर्ष के लिये नियुक्त हो सकेगा तथा चार वर्ष बाद पुन: उसे चार वर्ष के लिये और नियुक्त किया जा सकेगा। चूंकि जवाहर लाल नेहरु कृषि विवि जबलपुर एवं राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विवि ग्वालियर में भी कुलपति दस साल तक नियुक्त रहने का प्रावधान है, इसलिये वेटनरी साईंस विवि के कुलपति के लिये भी यही प्रावधान कर दिया गया है। वेटनरी साईंस विवि में वर्तमान कुलपति डा. एसपी तिवारी मार्च 2020 में नियुक्त हुये हैं और अब उनका कार्यकाल वर्ष 2025 तक रहेगा जबकि पहले यह वर्ष 2024 तक ही था।

विधेयक में हुई गफलत :

उक्त संशोधन विधेयक पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया था और पारित कराया था,लेकिन इस विधेयक में एक गफलत हो गई थी। इसमें दस साल तक कुलपति नियुक्त करने का जो नया प्रावधान किया गया, उसी प्रावधान का हुबहू उल्लेख विधेयक के उपबंध में कर दिया गया जिससे यह समझ ही नहीं आ रहा है कि नया संशोधन क्या किया गया। जबकि उपबंध में कुलपति को पहले चार वर्ष और इसके बाद पुन: चार वर्ष के लिये नियुक्त किये जाने का उल्लेख करना था।

विधेयक पशुपालन विभाग से लेकर विधि विभाग तक परीक्षित किया जाता है तथा राज्यपाल भी पारित विधेयक को मंजूरी देने के पहले उसका परीक्षण करते हैं। लेकिन इन तीनों स्तरों पर इस गफलत को नहीं देखा गया। मंत्रालय में स्थित पशुपालन विभाग के ओएसडी डा. खरे एवं वेटनरी साईंस विवि जबलपुर के रजिस्ट्रार डा. श्रीकांत जोशी का कहना है कि इस गफलत को कैसे ठीक किया जाये, इसका परीक्षण किया जायेगा।