भोपाल। प्रदेश में अब जहरीले गोंद का संकट आ गया है। अध्यात्म विभाग की मंत्री ऊषा ठाकुर ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से की है जिस पर अब वन विभाग से जांच रिपोर्ट मंगाई गई है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के वनों से धावड़ा आदि प्रजाति के वृक्षों से गोंद निकाला जाता है। यह गोंद वनाधिकार कानून के तहत वन क्षेत्र में पट्टा प्राप्त आदिवासी समुदाय निकाल रहा है जिसे व्यापारियों को बेचा जाता है। यह गोंद प्रसव के बाद महिलाओं को खिलाये जाने वाले लड्डुओं को बनाने में भी इस्तेमाल होता है। गोंद के असामाजिक तत्व वाले व्यापारी वनों में लगे वृक्षों से ज्यादा गोंद निकालने के लिये आदिवासियों को जहरीले केमिलकल युक्त इन्जेक्शन दे रहे हैं जो इन गोंद के पेड़ों में लगाया जाता है। इससे पेड़ अप्राकृतिक रुप से ज्यादा गोंद उत्सर्जित तो करने लगत है, परन्तु कुछ ही समय में पेड़ मुरझाकर गिर जाता है। केमिकल इंजेक्शन को लगाये जाने से पेड़ों से जो गोंद निकलता है उसमें भी यह जहर आ जाता है।
मंत्री ऊषा ठाकुर जोकि खण्डवा जिले की प्रभारी मंत्री भी हैं, ने खण्डवा सामान्य वनमंडल के अंतर्गत बागली वन वृत्त में जहरीले इंजेक्शन से गेंद निकाले जाने एवं ऐसा जहरीला गोंद काफी मात्रा में बाजार जाने की शिकायत सीएम से लिखित में की है। इस पर सीएम ने वन विभाग से जांच रिपोर्ट तलब कर ली है। वन विभाग ने खण्डवा डीएफओ से यह जांच कर प्रतिवेदन भेजने के लिये कहा है। कुछ समय पहले बैतूल जिले में भी यह मामला प्रकाश में आया था जिस पर वन विभाग ने जांच कराई थी और अब मामला कोर्ट में लंबित है।
दरअसल वन संरक्षण कानून में वर्ष 2005 में संशोधन किया गया था कि यदि डीएफओ पाये कि वनों में प्राप्त लघु वनोपज के एकत्रीकरण में पेड़ों को खतरा है तो वह संबंधित वन क्षेत्र को लघु वनोपज के एकत्रीकरण से प्रतिबंधित कर सकता है। इधर वर्ष 2008 में वनाधिकार कानून प्रभावशील किया गया जिसमें वन भूमि पर पट्टा प्राप्त आदिवासियों को वनों के लघुवनोपज पर अधिकार दिया गया। परन्तु साथ ही वनों की सुरक्षा करने का दायित्व भी दिया गया। लेकिन वन संरक्षण कानून का क्रियान्वयन वन विभाग करता है और वनाधिकार कानून का ट्रायबल विभाग। इन दोनों कानूनों के कारण वन विभाग को वनों से जहरीले इंजेक्शन से गोंद निकालने पर कार्यवाही करने में स्थानीय स्तर पर विरोध होने के कारण परेशानी आती है। इसके अलावा, जहरीले गोंद की जांच करने के लिये भी उपयुक्त लैब मौजूद नहीं है। केंद्र सरकार की फूड लेबोरेटरी से अब इस मामले की जांच कराई जा रही है।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि वनों में केमिकल इंजेक्शन लगाकर गोंद निकाले जाने की शिकायत आई है जिस पर जांच रिपोर्ट मंगाई जा रही है। सेम्पल लेकर इसकी जांच भी कराई जायेगी।
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प्रदेश में अब जहरीले गोंद का संकट, मंत्री की शिकायत पर वन विभाग से रिपोर्ट मंगाई
मंत्री ऊषा ठाकुर जोकि खण्डवा जिले की प्रभारी मंत्री भी हैं, ने खण्डवा सामान्य वनमंडल के अंतर्गत बागली वन वृत्त में जहरीले इंजेक्शन से गेंद निकाले जाने एवं ऐसा जहरीला गोंद काफी मात्रा में बाजार जाने की शिकायत सीएम से लिखित में की है।