भोपाल: राज्य सरकार के पुलिस मुख्यालय ने एसटीएफ सहित सभी क्षेत्रीय पुलिस इकाईयों को परिपत्र जारी कर कहा है कि वे विशेष अधिनियमों में सीधे एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट दायर नहीं करें क्योंकि यह विधि अनुसार नहीं है। परिपत्र में कहा गया है कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 के उल्लंघन पर अभियोजन संस्थित करने के पूर्व केंद्र सरकार के प्राधिकृत अधिकारी की मंजूरी आवश्यक है। मप्र देनदार संरक्षण अधिनियम 1937 केवल उन्हीं क्षेत्रों में लागू होंगे जिन्हें राज्य सरकार अधिसूचित करे, इसलिये संबंधित थाना अपराध पंजीबध्द करने के पूर्व देखे की उसका क्षेत्र अधिसूचित है या नहीं। मप्र खनिज अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण का निवारण नियम 2006 के उल्लंघन पर तहत सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। खान एवं खनिज विकास एवं विनियम अधिनियम 1957 के उल्लंघन पर पुलिस का अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत नहीं होगा बल्कि केंद्र या राज्य सरकार का प्राधिकृत अधिकारी ही ऐसे प्रकरणों को संज्ञान में लेकर न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करेगा। केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम 2017 के उल्लंघन पर अपराध का संज्ञान जीएसटी आयुक्त की पूर्व स्वीकृति के बिना पुलिस नहीं ले सकेगी। इसी प्रकार, मप्र सहकारी समितियों का अधिनियम 1960 के उल्लंघन पर अभियोजन सहकारिता रजिस्ट्रार की लिखित मंजूरी के बिना संस्थित नहीं किया जायेगा।
दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 तथा घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद पर कार्यवाही संस्थित की जाती है परन्तु पीडि़त अपनी शिकायत में उसके साथ बीएनएस अथवा अन्य विधि में संज्ञेय किसी अपराध की शिकायत भी करता है तब पुलिस अधिकारी प्रकरण में विधि अनुसार एफआईआर लिख कर कार्यवाही करेगा। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 में धन शोधन के अपराध का दण्ड सात वर्ष है तथा इसमें दिये गये अपराध संज्ञेय होते हैं परन्तु इन अपराधों की विवेचना पुलिस नहीं कर सकती है।