बीजेपी की पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद को लेकर दिए गए बयान से देश-विदेश में हड़कंप मच गया है।हालांकि बीजेपी ने नूपुर शर्मा को पार्टी से सस्पेंड कर दिया है, लेकिन विपक्ष अभी भी बीजेपी पर हमला बोल रहा है और उन्हें जेल भेजने की मांग पर अड़ा है।

मामला इतना बढ़ गया कि नूपुर शर्मा की टिप्पणी पर कतर, कुवैत और ईरान ने भारतीय राजदूतों को तलब किया। कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले में बीजेपी पर निशाना साधा है।

कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने लिखा, नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल, ये लोग नफ़रत की राजनीति की मानसिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब उन्हें पीछे धकेलने का समय आ गया है।

दिग्विजय सिंह ने नूपुर के बहाने सीएम योगी पर साधा निशाना-

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा, भारत सरकार भाजपा के दो प्रवक्ताओं के बयान को "फ्रिंज एलिमेंट्स" के रूप में बताती है..!! उन्हें भाजपा के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में किसने नियुक्त किया? क्या भाजपा अध्यक्ष "फ्रिंज एलीमेंट्स" वाले प्रवक्ता नियुक्त करने की जिम्मेदारी स्वीकार करेंगे और सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे? 

एक अन्य ट्वीट में दिग्विजय सिंह ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए लिखा, अब दो निलंबित और निष्कासित भाजपा नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का क्या? क्या यूपी पुलिस को उनके खिलाफ मामला दर्ज नहीं करना चाहिए? क्या किसी धर्म के खिलाफ बोलना कानून के तहत अपराध नहीं है? यूपी पुलिस केस दर्ज नहीं करेगी। क्यों? क्योंकि उस परिभाषा में सीएम यूपी भी "फ्रिंज एलिमेंट" कैटेगरी में आ सकते है.!!

भाजपा सख्त कानून के तहत जेल भेजती है : मायावती

मायावती ने लिखा, देश में सभी धर्मों का सम्मान जरूरी। किसी भी धर्म के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं। इस मामले में बीजेपी को भी अपने लोगों पर सख्ती से शिकंजा कसना चाहिए। केवल उनको सस्पेंड व निकालने से काम नहीं चलेगा बल्कि उनको सख्त कानूनों के तहत् जेल भेजना चाहिए।  इतना ही नहीं बल्कि कानपुर में अभी हाल ही में जो हिंसा हुई है, उसकी तह तक जाना बहुत जरूरी। साथ ही, इस हिंसा के विरुद्ध हो रही पुलिस कार्रवाईयों में निर्दोष लोगों को परेशान ना किया जाए, बीएसपी की यह भी माँग है।

क्या कहा बीजेपी ने?

भाजपा केंद्रीय अनुशासन समिति के सदस्य सचिव ओम पाठक ने नूपुर शर्मा को लिखे पत्र में कहा, आपने पार्टी की स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर असहमति व्यक्त की है, जो पार्टी के संविधान के नियम 10 (ए) का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके लिए अभी आगे की जांच लंबित है, इसलिए आपको तत्काल प्रभाव से पार्टी और आपकी जिम्मेदारियों/कार्य से निलंबित किया जाता है।