डॉ. नवीन जोशी
भोपाल। राज्य के वन विभाग की वन्यप्राणी शाखा ने वन क्षेत्रों में बिजली की खुली लाईनों को इनस्यूलेट करने या उन्हें केबल लगाकर अण्डर ग्राउण्ड करने के लिये सहमति दे दी है। बजट उपलब्ध होने पर यह कार्य किया जायेगा।
दरअसल वन्य प्राणी शाखा के पास प्रस्ताव आया था कि वन क्षेत्रों में बिजली की लाईन खुली होने के कारण उसमें हुक लगाकर करंट से वन्यजीवों को क्षति पहुंचाई जाती है। यदि इन तारों को इनस्यूलेट किया जाये या केबल लगाकर अंडरग्राउंड कर दिया जाये तो वन्यजीव हानि और फसल के नुकसान को रोका जा सकता है।
यदि ऐसा नहीं किया जा सकता है तो वन क्षेत्रों को फेंसिंग लगाकर सुरक्षित किया जा सकता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि वन विभाग जितना खर्च वन्य प्राणियों को बचाने में, खासकर शिकारी वन्यजीवों पर बहुत खर्चा करता है, वह उक्त सुरक्षा उपाय करने से कम हो सकता है। इस प्रस्ताव पर पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने सहमति प्रदान कर दी है तथा कहा है कि बजट की उपलब्धता के अनुसार अण्डर ग्राउण्ड विद्युत लाईन बिछाने एवं फेंसिंग किये जाने का प्रयास किया जा सकेगा।
फसल हानि का मुआवजा वन विभाग दे-
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने वन्य प्राणियों द्वारा फसल हानि किये जाने पर मुआवजा राजस्व विभाग द्वारा देने के स्थान पर वन विभाग द्वारा दिये जाने के प्रस्ताव पर भी सहमति प्रदान की है क्योंकि राजस्व विभाग यह मुआवजा काफी विलम्ब से बांटता है। प्रस्ताव पर सहमति देते हुये कहा गया है कि वन विभाग द्वारा फसल हानि का मुआवजा बांटने से वन विभाग के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा जो वन्य प्राणी संरक्षण के लिये सहायक होगा।